प्रयागराज। दीपावली के पावन पर्व पर स्वदेशी उत्पादों को बढ़ावा देने और स्थानीय कारीगरों का उत्साह बढ़ाने के उद्देश्य से एसीपी कौंधियारा अब्दुल सलाम खान ने बुधवार को गौहनिया बाजार पहुंचकर मिट्टी के दीये खरीदे। इस दौरान उन्होंने दुकानदारों से बातचीत कर दीपावली की तैयारियों का जायजा लिया और लोगों से चाइनीज लाइट के बजाय मिट्टी के दीयों से घरों को रोशन करने की अपील की।
एसीपी अब्दुल सलाम खान ने कहा कि दीपावली केवल रोशनी और खुशियों का त्योहार नहीं है, बल्कि यह हमारी संस्कृति, परंपरा और आपसी भाईचारे का भी प्रतीक है। इस पर्व पर स्वदेशी उत्पादों को अपनाकर हम अपने स्थानीय कारीगरों और छोटे व्यापारियों की आर्थिक स्थिति मजबूत करने में योगदान दे सकते हैं। मिट्टी के दीये खरीदने से कुम्हारों को रोजगार मिलता है और पारंपरिक कला को भी बढ़ावा मिलता है।
उन्होंने लोगों से अपील करते हुए कहा कि इस दीपावली पर अधिक से अधिक स्वदेशी उत्पादों का इस्तेमाल करें और स्थानीय बाजारों से खरीदारी को प्राथमिकता दें। उन्होंने कहा कि मिट्टी के दीयों की रोशनी हमारी परंपरा से जुड़ी है। ऐसे में सभी को स्वदेशी अपनाने और स्थानीय कारोबारियों का सहयोग करने के लिए आगे आना चाहिए।
बच्चों को मिठाई खिलाकर बांटीं त्योहार की खुशियां
गौहनिया बाजार में खरीदारी के दौरान एसीपी अब्दुल सलाम खान ने वहां मौजूद बच्चों को अपने हाथों से मिठाई खिलाकर दीपावली की खुशियां साझा कीं। पुलिस अधिकारी का यह स्नेहपूर्ण व्यवहार देखकर स्थानीय लोगों और दुकानदारों में उत्साह देखने को मिला। बाजार के व्यापारियों ने भी स्वदेशी उत्पादों को प्रोत्साहित करने की इस पहल की सराहना की। उनका कहना था कि जब प्रशासन के अधिकारी स्थानीय बाजारों से खरीदारी करते हैं और छोटे दुकानदारों का उत्साह बढ़ाते हैं, तो इससे अन्य लोगों को भी प्रेरणा मिलती है।
सुरक्षित और शांतिपूर्ण दीपावली मनाने की अपील
इस अवसर पर थाना प्रभारी घूरपुर, चौकी इंचार्ज गौहनिया सहित कई पुलिसकर्मी, स्थानीय व्यापारी और आम नागरिक मौजूद रहे। एसीपी ने सभी को दीपावली की शुभकामनाएं देते हुए त्योहार को शांतिपूर्ण और सुरक्षित तरीके से मनाने की अपील की।
एसीपी अब्दुल सलाम खान की इस पहल को स्थानीय स्तर पर स्वदेशी उत्पादों को बढ़ावा देने और छोटे कारोबारियों का मनोबल बढ़ाने की दिशा में एक सकारात्मक कदम माना जा रहा है। उनकी इस पहल से लोगों को पारंपरिक मिट्टी के दीयों के इस्तेमाल और स्थानीय कारीगरों के सहयोग का संदेश मिला।
