आज़मगढ़ में उलेमा काउंसिल ने खेल दिया बड़ा दाँव , साबित किया अपने दावे को

उत्तर प्रदेश में त्रिस्तरीय चुनाव को लेकर पार्टियों की तैयारियां ज़ोरों पर हैं . प्रदेश के पूर्वी जिले आज़मगढ़ में भी त्रिस्तरीय चुनाव को लेकर सरगर्मियां तेज़ हैं . राजनैतिक पार्टियाँ मजबूत से मजबूत उम्मेदवार मैदान में उतारने की कोशिश में हैं ताकि त्रिस्तरीय चुनाव में जीत का लाभ वो आगे आने विधानसभा चुनाव में ले सकें . आज़मगढ़ से ही निकलकर कई राज्यों में अब अपनी जड़ें जमा चुकी राष्ट्रीय उलेमा काउंसिल ने भी अपने जिला पंचायत सदस्यों की पहली सूची ज़ारी करदी है . भले ही इस पार्टी का नाम मुस्लिम उलेमा से संदर्भित है .

लोग ये सोचते हैं कि ये मुसलामानों की पार्टी है , लेकिन मामला बिलकुल इसके उलट है . 4 अक्टूबर 2008 को बनी इस पार्टी का बड़ा मशहूर नारा है “ एकता का राज चलेगा , हिन्दू – मुस्लिम साथ चलेगा ” . उलेमा काउंसिल ने कभी धार्मिक राजनीति पर जोर नहीं दिया . हमेशा मुद्दों की राजनीती करना मौलाना आमिर रशादी और अब राजनीति से संन्यास ले चुके मौलाना ताहिर मदनी की प्रार्थमिकता में शामिल रहा है . इस त्रिस्तरीय चुनाव में भी पार्टी ने अपने नारे के अनुरूप ही हर धर्म , हर समाज के जिला पंचायत सदस्यों को अपना प्रत्याशी बनाकर उन्हें मैदान में उतारा है .

इस बार राष्ट्रीय उलेमा काउंसिल फ्रंट पर खेल रही है . जगदीशपुर जैसी महत्वपूर्ण और अनारक्षित सीट पर जहाँ मुस्लिम बाहुल्य इलाका है   , वहां से दलित  समाज की महिला को टिकट देकर समाज के सबसे वंचित वर्ग की आवाज बनने के अपने दावे को साबित किया . राष्ट्रीय उलेमा काउंसिल के इस फैसले की चर्चा हर तरफ हो रही है . पार्टी ने इस बार अपनी तैयारियां काफी पहले शुरू करदी थीं . पार्टी के राष्ट्रीय प्रवक्ता तल्हा रशादी ने बातचीत में इस बार बेहतर परिणामों की उम्मीद जताई है . वहीँ पार्टी के एक पुराने नेता और ओवैसी की पार्टी को छोड़कर दुबारा राष्ट्रीय उलेमा काउंसिल में शामिल होने वाले  कलीम जामेई के आने से पार्टी को काफी मजबूती मिलने के असार हैं . कलीम जामेई की पत्नी सायमा राजापुर सिकरौर से पार्टी की उम्मीदवार हैं.

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