काश योगी जी की एक नजर कुशीनगर के नौनिहालों पर भी पड़ जाती तो शायद…

काश योगी जी कीएक नजर कुशीनगर के नौनिहालों पर भी पड़ जाती तो शायद
शिक्षको की कमी से जूझ रहे इस जनपद में पहले से ही बेपटरी पर चल रही प्राथमिक शिक्षा  सुधार जाती
हम बात कर रहे है उत्तर प्रदेश की जनपद कुशीनगर कीकही एकल शिक्षक तो कही शिक्षामित्रों के भरोसे चल रहे प्राथमिक विद्यालय, पठन पाठन रामभरोसे
अंतर्जनपदीय तबादले के चलते और बिगड़ सकते हैं हालात
शिक्षको की कमी से जूझ रहे इस जनपद के बच्चों के भविष्य के लिए तबादला बन सकता है कहर
यहां से तबादला करा जाने वालों की तादात अधिक, आने वालों की संख्या काफी कम
बिगत वर्षो में हुए तबादला जाने व आने वालों की संख्या पर एक नजर दौड़ाई जाय तो हकीकत आ जायेगी सामने
कुशीनगर एक ऐसा जनपद है जो बिहार सीमा के निकट है और शिक्षा की दृष्टि से काफी पिछड़ा हुआ है, इसका एक कारण सरकार की ढुलमुल नीतियां जिम्मेदार है।
नियुक्ति के समय जब पूरे प्रदेश की मेरिट बनाई जाती हैं तो यहां रिक्तियों की संख्या सर्वाधिक होती हैं। रिक्तियां की संख्या सर्वाधिक होने और कम मेरिट होने के बाद भी शिक्षा की दृष्टि से पिछड़ा होने के चलते यहां के लोग मेरिट सूची से बाहर हो जाते हैं, जबकि दूसरे जनपदों में मेरिट अधिक तो होती ही हैं रिक्तियों की संख्या भी कम होती है। ऐसे में यहां के लोग जब कम मेरिट के बाद अपने जनपद में तैनाती नही पाते है तो दूसरे जनपद में बढ़े हुए मेरिट व कम रिक्तियों में नियुक्ति पाना टेढ़ी खीर है, अगर किसी ने पा भी लिया तो उनकी संख्या न के ही बराबर होगी।दूसरी तरफ कुशीनगर में रिक्तियों की संख्या अधिक होने के चलते अन्य जिले के अभ्यर्थियों के लिए पहली पसंद होती हैं और उन्हें यहां नियुक्ति पाने में कामयाबी भी मिल जाती हैं।
फिर वोट बैंक की राजनीति के चलते शुरू होता हैं तबादले का खेल
दूसरे जनपद के लोग तैनाती के बाद से ही अपने तबादले को लेकर जुट जाते हैं और सरकार भी इनके अनुसार इस जनपद के नौनिहालों की फिक्र न करते हुए तबादला नीति में संशोधन कर प्रक्रिया प्रारंभ कर देती है।
अपनी उची पहुच व रसूख के साथ ही सरकार की नीति के अनुसार बाहरी जिले के शिक्षक अपने मनचाहे जिले में चले जाते हैं। फिर यहां रिक्तियां पूर्व की भांति हो जाती है,
कुल मिलाकर यह जिला केवल नियुक्ति पाने के लिए ही हैं।
अगर बिगत वर्ष हुए अंतर्जनपदीय तबादले में इस जिले से जाने वाले व इस जिले में आने वाले शिक्षको की संख्या पर नजर दौड़ाई जाय तो हकीकत से पर्दा उठता हुआ नजर आएगा। वोट बैंक की राजनीति के चलते सरकार की तबादला नीति व सेवा नियमावली में किये जाने वाले संशोधन का परिणाम यह हैं कि कुछ जनपदों में पद के सापेक्ष शिक्षको की संख्या अधिक है तो कही इतनी रिक्तियां हैं कि विद्यालय एकल शिक्षक व शिक्षामित्रो के भरोसे ही संचालित हो रहे हैं।
अभी भी कुशीनगर सहित अन्य पिछड़े जिले पर नजर दौड़ाई जाय तो वहां का शिक्षक अनुपात चिंतनीय हैं।
ऐसे में पहले ही शैक्षिक दृष्टि से पिछड़ेपन की समस्या से जूझ रहे उन जनपदों में केवल स्कूल चलो रैली निकालकर ही शिक्षा के स्तर को बढ़ावा दिया जा रहा है, कारण कि उन जनपदों में शिक्षकों की कमी के चलते विद्यालय कही एकल तो कही शिक्षामित्रों के भरोसे संचालित हो रहे हैं। ऐसे में 5 कक्षाओ वाले प्राथमिक व 3 कक्षाओं वाले जूनियर विद्यालयों मे एकल शिक्षक के भरोसे शिक्षा का स्तर बढाना पत्थर पर घास उगाने के बराबर है क्यो कि इन्ही एकल शिक्षक को सरकार की एमडीएम, बच्चो की उपस्थिति, ड्रेस, जूता, किताब वितरण सहित अन्य योजनाओं का क्रियान्वयन भी करना है और शासन को रिपोर्ट भी देनी है। इन विद्यालयों शिक्षकों पर यह कहावत अकेला चना भाड़ नही फोड़ सकता हैं, सटीक बैठती है। कुल मिलाकर प्रदेश के अन्य जनपदों की अपेक्षा कुशीनगर का शिक्षक अनुपात पहले ही काफी कम है। शिक्षक अनुपात को ध्यान में न रखते हुए तबादले होते है तो इस अंतर्जनपदीय तबादले के बाद यहां की प्राथमिक शिक्षा की तस्वीर काफी भयावह हो सकती हैं और अधिकतर विद्यालयों पर ताले लटक सकते है और यहां के नौनिहालों की प्राथमिक शिक्षा रामभरोसे हो जाएगी।
लोगो ने क्षेत्रीय जनप्रतिनिधियों से इस जनपद के नौनिहालों के भविष्य को देखते हुए सीएम का ध्यान आकृष्ट कराने के साथ ही शिक्षक अनुपात सही न होने तक कुशीनगर जनपद में तबादले की प्रक्रिया पर रोक लगाने की मांग की है।
*एक तरफ सरकार गरीबो के लिए जनकल्याणकारी योजनाओं का संचालन कर उन्हें विकास की मुख्य धारा में लाने की बात कर रही है, लेकिन किसी भी समाज का विकास शिक्षा का स्तर बढाकर ही किया जा सकता है। हम सभी को ज्ञात है कि परिषदीय विद्यालयों में गरीब परिवार के नौनिहाल पढ़ने जाते हैं तो ऐसी दशा में शिक्षकों की कमी के साथ उनके बेहतर भविष्य की कल्पना भी नही की जा सकती है।*
अब देखा जाय कि सरकार वोट बैंक की राजनीति करती है या वास्तव में इन गरीब परिवारों के नौनिहालों के भविष्य को लेकर अपनी तबादला नीति में संशोधन कर इस पिछड़े कुशीनगर के बच्चों का भी   ख्याल रखते हुए इस जिले में शिक्षक अनुपात सही न होने तक तबादले की प्रक्रिया पर रोक लगाती है, गरीब परिवार के बच्चों के साथ ही अभिभावको की उम्मीदों पर कितना खरा उतरती है, यह तो भविष्य के गर्त में है।वही इस जनपद में अपने को गरीबो का मसीहा बताने की होड़ में लगे जनप्रतिनिधि वास्तव में इनके प्रति क्या सोच रखते है और इस मुद्दे पर कैसी मुहिम व आंदोलन चलाते हुए आगे आते हैं,जिसपर सबकी निगाहें है।
मोहम्मद आसिफ सी आई बी इंडिया न्यूज
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