अराजकतत्वों की निगरानी के नाम पर पुलिस ने किया तांडव

सोमवार की रात बस स्टाप तिराहे पर हुआ नंगा नाच

फतेहपुर। जहां एक ओर प्रदेश के मुख्यमंत्री व पुलिस महानिदेशक जनता के साथ मित्रवत व्यवहार करते हुए अपराधिकतत्वों पर लगाम लगाने के फरमान लगातार जारी कर रहे हैं। वहीं इन फरमानों के उलट शहर पुलिस अराजकतत्वों की निगरानी व वाहन चेकिंग के सहारे सभ्य लोगों को पूछताछ के पहले ही पीटकर नंगा नाच करने में जुटी है। सोमवार की रात ज्वालागंज बस स्टाप पर पुलिस की गाड़ी पर सवार सब इंस्पेक्टरों व पुलिस कर्मी आने जाने वाले कई वाहनों को रात ग्यारह बजे रोक रहे थे। रूकने वालों से पुलिस कर्मी बिना पूछताछ किये पिटाई करने लगते थे। पुलिस की जद में आये कई संभ्रान्त लोगों ने पुलिस की इस कार्यशैली पर योगी सरकार व डीजीपी के फरमान को कलंक बताया।
बताते चलें कि अराजकतत्वों की निगरानी के लिए शहर पुलिस अलग-अलग चौराहों पर रात दस बजे के बाद मुस्तैद हो जाती है। रात को पुलिस का मुस्तैद होना तो अच्छी बात है लेकिन आने-जाने वाले बाइक सवारों को रोक कर सीधे मारपीट करना न्यायसंगत नहीं लगता। रात को पुलिस द्वारा कई लोगों की बेवजह की गयी पिटाई मंगलवार को सुबह जंगल में आग की तरह फैल गयी। पुलिस उत्पीड़न के शिकार हुए कई लोगों ने मीडिया से अपने साथ हुए दुर्व्यवहार का दुखड़ा सुनाया। लोगों का कहना है कि यदि पुलिस वाहनों की चेकिंग के लिए मुस्तैद की गयी है तो उसे बाइक चलाने वाले से उसके कागजात तलब करने चाहिए। मारने-पीटने का उसे अधिकार नहीं मिला है। यदि वाहन स्वामी की गाड़ी के कागजात न हों तो उसका चालान करें, जुर्माना करें और अधिक हो तो गाड़ी को सीज भी कर दें लेकिन मारपीट करना उचित नहीं है।

पत्रकार से अभद्रता करने वाले दरोगा व सिपाही लाइन हाजिर
फतेहपुर। सोमवार की रात हरिहरगंज पुलिस चौकी इंचार्ज व उनके हमराही सिपाही द्वारा एक टीवी चैनल के पत्रकार के साथ की गयी मारपीट व दुर्व्यवहार के मामले से पत्रकारों में रोष व्याप्त हो गया। फतेहपुर प्रेस क्लब के अध्यक्ष नागेन्द्र प्रताप सिंह की अगुवई में पत्रकारों का एक जत्था मंगलवार को पुलिस अधीक्षक रमेश से मिला। पुलिस अधीक्षक को पूरी घटना से अवगत कराते हुए मारपीट करने वाले दरोगा व सिपाही को निलंबित करने के साथ ही मुकदमा दर्ज कराये जाने की मांग की गयी। एसपी ने मामले को गम्भीरता से लेते हुए चौकी इंचार्ज कालिका प्रताप सिंह व सिपाही श्याम नारायण दुबे को तत्काल प्रभाव से लाइन हाजिर कर दिया।
जानकारी के अनुसार एक टीवी चैनल के पत्रकार नितेश श्रीवास्तव अपने सहयोगी हरिओम की बीमार पत्नी की दवा दिलाने के लिए हरिहरगंज गये हुए थे। बारह बजे रात होने के कारण सभी मेडिकल स्टेर बंद थे। इस पर नितेश ने अपने एक अन्य सहयोगी अमित से सम्पर्क साधा क्योंकि अमित के पिता एक क्लीनिक में फार्मेसिस्ट हैं। पत्रकार अमित के पिता से बातचीत कर ही रहे थे कि कोतवाली की जीप आ गयी जिस पर इंस्पेक्टर सतेन्द्र सिंह बैठे हुए थे। जबकि चौकी इंचार्ज हरिहरगंज गाड़ी को चला रहे थे। गाड़ी पर एक और सब इंस्पेक्टर तथा सिपाही बैठा हुआ था। चौकी इंचार्ज कालिका प्रताप सिंह गाड़ी से उतरे और पुलिसिया रौब में पत्रकार से बात करते-करते पत्रकार को दो तमाचे जड़ दिये। पत्रकार ने बताया कि साथ में मौजूद रहे शहर कोतवाल ने चौकी इंचार्ज को रोकने का प्रयास किया लेकिन इस पर भी वह नहीं माने और मोबाइल छीन लिया इतना ही नहीं उसकी बाइक को भी चौकी पर खड़ी करा लिया। चौकी इंचार्ज इस पर भी ठण्डे नहीं हुए और वह नितेश सहित सभी चारों लोगों को कोतवाली ले गये। जहां रात डेढ़ बजे कोतवाल के हस्ताक्षेप पर सभी को छोड़ दिया गया। मंगलवार को यह मामला मीडिया में फैल गया। जिससे पत्रकारों में रोष व्याप्त हो गया। फतेहपुर प्रेस क्लब के अध्यक्ष नागेन्द्र सिंह के नेतृत्व में बड़ी संख्या में पत्रकार एसपी से मिले। एसपी ने मामले को गम्भीरता से लेते हुए चौकी इंचार्ज व सिपाही को लाइन हाजिर करते हुए पूरे मामले की जांच पुलिस उपाधीक्षक नगर केडी मिश्रा को सौंप दी।

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