किसानों की समस्याओं को लेकर भाकियू ने तीनों तहसीलों में दिया धरना

किसानों की समस्याओं को लेकर भाकियू ने तीनों तहसीलों में दिया धरना
सम्बन्धित उपजिलाधिकारियों ने समस्याओं के निस्तारण का दिया आश्वासन

फतेहपुर। प्रदेश के किसानों की हालत बद से बदतर होने के साथ-साथ प्रदेश सरकार द्वारा बढ़ाई जा रही विद्युत दरों के विरोध में भारतीय किसान यूनियन के पदाधिकारियों ने जनपद की तीनों सदर, खागा एवं बिन्दकी तहसील में तहसील अध्यक्षों की अगुवई में धरना दिया। धरने में किसान नेताओं ने अपनी-अपनी आवाज बुलन्द करते हुए शीघ्र ही समस्याआें का निस्तारण करने की मांग की। धरने की जानकारी होने पर तीनों तहसीलों में सम्बन्धित उप जिलाधिकारी मौके पर पहुंचे और किसान नेताओं से वार्ता की। सभी एसडीएम ने आश्वासन दिया कि शीघ्र ही किसानों की समस्याएं हल करवाने का प्रयास किया जायेगा।
भारतीय किसान यूनियन के सदर तहसील अध्यक्ष दीपक गुप्ता की अगुवई में पदाधिकारियों व किसानों ने तहसील परिसर में एक दिवसीय धरना दिया। धरने को सम्बोधित करते हुए वक्ताओं ने कहा कि भाकियू हमेशा किसानों के लिए संघर्ष करती है।

पिछले काफी समय से किसानों की समस्याओं के सम्बन्ध में आन्दोलन के माध्यम से अवगत कराया जा चुका है। किसानों की समस्याओं को गम्भीरता से नहीं लिये जाने के कारण मजबूर होकर भाकियू को बेहद गर्मी के बावजूद सड़कों पर उतरना पड़ रहा है। वक्ताओं ने पंचायत के माध्यम से मांग किया कि विद्युत नियामक आयोग द्वारा प्रस्तावित बिजली दरों को स्वीकृत न दी जाये। किसानों को निजी नलकूप हेतु बिजली निःशुल्क उपलब्ध करायी जाये। किसानों को ब्याज व पैनाल्टी में 31 जुलाई 2019 तक दी जाने वाली छूट में गैर पंजीकृत किसानों को भी शामिल किया जाये। सामान्य योजना के अन्तर्गत स्वीकृत सभी नलकूप कनेक्शन का शत-प्रतिशत लक्ष्य निर्गत किया जाये। सामान्य योजना के अन्तर्गत कनेक्शन पर दी जाने वाली सब्सिडी में वृद्धि की जाये। राज्य में सोयाबीन, दलहन, बासमती धान, मक्का, आलू सहित फसल एवं सब्जियों को भी समर्थन मूल्य के अधीन लाया जाये।

आलू का समर्थन मूल्य कम से कम 1200 रूपये प्रति कुन्तल तय किया जाये। गाय और भैंस दोनों के दूध के दाम समान रूप से निश्चित किये जायें। पशुपालक किसानों को बैंक क्रेडिट कार्ड स्कीम के अन्तर्गत लाया जाये। फसलों की खरीद समर्थन मूल्य से कम न होना सुनिश्चित किया जाये। किसानों को खरीफ व रबी फसली ऋण एक साथ दिया जाये। सहकारी समितियों में जून में केवल ब्याज जमा करने की अनुमति दी जाये। टेल तक पानी पहुंचाने की कारगर व्यवस्था सुनिश्चित की जाये। कृषि वानिकी के अन्तर्गत आने वाले सभी वृक्षों पर सभी जनपदों में कटाई एवं ढुलाई पर लगाये गये प्रतिबन्ध को समाप्त करते हुए मण्डी शुल्क भी समाप्त किया जाये। किसान सूखा व असमय बारिश की मार झेल रहे हैं। जिससे किसानों पर कर्ज का बड़ा भार हो गया है। बुन्देलखण्ड के किसानों के सभी कर्ज माफ किये जायें। प्रदेश में किसानों की आत्महत्या एवं पलायन रोकने के लिए एक बार सभी किसानों का सभी तरह का कर्ज पूर्णतः माफ किया जाये। प्रदेश में सभी आवारा पशुओं के द्वारा किसानों की फसलों को नष्ट होने से बचाया जाये। किसान सम्मान निधि योजना में राज्य सरकार का अंशदान बढ़ाकर इसे 10000 रूपये किया जाये।

राज्य में एक बेहतर किसान पेंशन योजना चालू की जाये। पेंशन का प्रीमियम किसानों से न लिया जाये। कृषि, पशुपालन, गन्ना, उद्यान, मत्स्य आदि से सम्बन्धित विभागों द्वारा एक्सटेंशन का कार्य नहीं किया जा रहा है। किसान विभाग की बजाय कम्पनियों की सलाह पर कार्य कर रहे हैं। एनजीटी के पुराने वाहनों पर आदेश से ट्रैक्टर को मुक्त किया जाये। आन्दोलन के दौरान किसानों पर दर्ज मुकदमें वापस लिये जायें। धरने की जानकारी होने पर उप जिलाधिकारी सदर प्रहलाद सिंह मौके पर पहुंचे और उन्होने किसान नेताओं से वार्ता किया। एसडीएम ने आश्वासन दिया कि उनकी मांगों पर जल्द विचार करवाने का प्रयास किया जायेगा। इसके बाद धरना समाप्त हो गया। इस मौके पर राजेन्द्र सिंह, सुरेन्द्र सिंह, प्रीतम सिंह, दीपक गुप्ता, भानू पटेल, गुड्डू लोधी, मुन्ना, वीरेन्द्र पटेल आदि मौजूद रहे।

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