डॉक्टर के साथ हुई घटना के विरोध में प्राइवेट अस्पतालों में हड़ताल

डॉक्टर के साथ हुई घटना के विरोध में प्राइवेट अस्पतालों में हड़ताल
– ओपीडी ठप होने से भटकते रहे मरीज
– सरकारी डॉक्टरो ने हड़ताल का किया समर्थन परन्तु राजकीय चिकित्सा रही चालू

फतेहपुर। पश्चिम बंगाल में डॉक्टर के साथ हुई हिंसा के विरोध में इंडियन मेडिकल एसोसिएशन के आह्वान पर देशव्यापी हड़ताल के तहत जनपद के डॉक्टरों ने भी हड़ताल में शामिल होते हुए सभी प्राइवेट अस्पतालों की ओपीडी का कार्य ठप कर डॉक्टरों की सुरक्षा सुनिश्चित कराये जाने की मांग किया। डॉक्टरों की इस हड़ताल में हलाकि सरकारी डॉक्टरों का समर्थन जरूर शामिल रहा लेकिन उनके द्वारा राजकीय चिकित्सा का कार्य सुचारू रूप से चालू रखा गया और जिला चिकित्सालय में रोजाना की तरह मरीज को देखे गये। प्राइवेट अस्पतालों में हड़ताल से मरीजों को काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ा और बीमार मरीजों का इलाज कराने के डॉक्टरों की मिन्नत करने के साथ ही मरीजों को लेकर इधर उधर भटकने को मजबूर रहे।
बता दे कि पश्चिम बंगाल में भीड़ हिंसा में डॉक्टर की मौत हो गयी थी जिसके विरोध में पश्चिम बंगाल में डॉक्टरों द्वारा हड़ताल की जा रही है। बंगाल सरकार व डॉक्टरों के बीच सहमति न बन पाने के कारण हड़ताल ने उग्र रूप धारण कर लिया है। डॉक्टरों के समर्थन में कई प्रदेशो के डॉक्टरों के संगठनो के अलावा सुरक्षा सुनिश्चित कराये जाने के लिये इन्डियन मेडिकल एसोसिएशन द्वारा भी 24 घण्टे की हड़ताल करने की घोषणा की गयी थी। जिसके तहत जनपद के आभा नर्सिंग होम, करुणा जीवन ज्योति नर्सिंग होम, राम सनेही मेमोरियल नर्सिंग होम समेत अन्य बड़े व छोटे नर्सिंग होम में चिकित्सकों द्वारा पूरी तरह से ओपीडी का कार्य ठप रखा गया। हलाकि भर्ती मरीजों की चिकित्सा सुविधा बहाल रही। वही जिला चिकित्सालय समेत पीएचसी सीएचसी के डॉक्टरों द्वारा आईएमए के हड़ताल का समर्थन तो किया गया लेकिन राजकीय सेवाओं को बाधित न करते हुए रोजाना की तरह मरीजों की ओपीडी चिकित्सा व इमरजेंसी सेवाएं संचालित की जाती रही। प्राइवेट अस्पतालों की ओपीडी ठप होने से जिला चिकित्सालयों में भारी भीड़ उमड़ी। दूर दराज से प्राइवेट अस्पतालों में दवाई लेने आये हुए मरीजों के तीमारदारों द्वारा जिला चिकित्सालय का ही सहारा लेना पड़ा। जिला चिकित्सालय के वरिष्ठ फिजिशियन डा0 विवेक कुमार निगम ने बताया कि डॉक्टर के साथ घटित हुई घटना निन्दनीय है। केंद्र व प्रदेश सरकार डॉक्टरों की सुरक्षा हेतु कड़े कानून बनाये। साथ ही बताया कि सभी डॉक्टरो द्वारा आईएमए की हड़ताल का समर्थन किया गया लेकिन प्राइवेट अस्पतालों में हड़ताल को देखते हुए सरकारी अस्पताल की चिकित्सा व्यवस्था को बाधित नही किया गया। मरीजों के लिए अस्पताल में मिलने वाली इमरजेंसी, ओपीडी समेत सभी तरह की सुविधाएं पहले की तरह ही संचालित की जाती रही।

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