2018 में विश्व के वाणिज्यिक सेवा निर्यात में भारत का हिस्सा बढ़कर 3.5 प्रतिशत हुआः आर्थिक समीक्षा 2019-20

अपने महत्व को बढ़ाते हुए सेवा क्षेत्र अर्थव्यवस्था तथा सकल मूल्यवर्धन (जीवीए) वृद्धि में लगभग 55 प्रतिशत हो गया है। भारत में कुल दो-तिहाई प्रत्यक्ष विदेशी निवेश आवक हुई है और यह क्षेत्र कुल निर्यात का 38 प्रतिशत हो गया है। यह जानकारी आज केन्द्रीय वित्त तथा कॉरपोरेट कार्य मंत्री श्रीमती निर्मला सीतारमण द्वारा संसद में प्रस्तुत आर्थिक समीक्षा 2019-20 में दी गई है। 33 राज्यों तथा केन्द्रशासित प्रदेशों में से 15 में इस क्षेत्र की हिस्सेदारी सकल राज्य मूल्यवर्धन के 50 प्रतिशत को पार कर गई है।

आर्थिक समीक्षा में बताया गया है कि अप्रैल-सितंबर 2019 के दौरान सेवा क्षेत्र ने कुल एफडीआई इक्विटी आवक में 33 प्रतिशत की छलांग लगाई है और यह आवक 17.58 बिलियन डॉलर पहुंच गई है। ऐसा सूचना तथा प्रसारण, विमान परिवहन, दूर-संचार, परामर्श सेवाओं तथा होटल और पर्यटन जैसे उप-क्षेत्रों में मजबूत एफडीआई आवक के कारण हुआ है।

आर्थिक समीक्षा में रेखांकित किया गया है कि हाल के वर्षों में वस्तुओं के निर्यात से अधिक सेवाओं का निर्यात हुआ है। इस कारण विश्व की वाणिज्यिक सेवा निर्यात में भारत की हिस्सेदारी पिछले दशकों में बढ़ी है और यह 2018 में 3.5 प्रतिशत पर पहुंच गई है। यह विश्व के 1.7 प्रतिशत वाणिज्यिक निर्यात से दोगुना है।

बजट पूर्व समीक्षा में कहा गया है कि उच्च फ्रीक्वेंशी वाले विभिन्न संकेतक तथा विमान यात्री यातायात, रेल माल ढुलाई यातायात, बंदरगाह और जहाजरानी माल ढुलाई यातायात, बैंक ऋण, आईटी-बीपीएम (बिजनेस प्रोसेस मैनेजमेंट) क्षेत्र राजस्व, विदेशी पर्यटक आगमन तथा पर्यटन विदेशी मुद्रा आय जैसे क्षेत्रवार डाटा बताते हैं कि 2019-20 के दौरान सेवा क्षेत्र में नरमी आई है। लेकिन अच्छी बात यह है कि 2019-20 के प्रारंभ में सेवा क्षेत्र में विदेशी प्रत्यक्ष निवेश (एफडीआई) में सुधार हुआ है और अप्रैल-सितंबर 2019 के दौरान सेवा निर्यात की गति तेज बनी रही है। समीक्षा में दीर्घकालिक दृष्टि से सुझाव दिया गया है कि द्विपक्षीय व्यापार वार्ताओं के दौरान सेवा निर्यात पर फोकस करना भारत के लिए व्यापार साझेदारों के साथ द्विपक्षीय व्यापार घाटे को दूर करने के लिए शुभ है।

आर्थिक समीक्षा में सेवा क्षेत्र के अंदर उप-क्षेत्रों के महत्वपूर्ण विकासों को दिखाया गया हैः

  • पर्यटन सेवाः  यह क्षेत्र विकास को बढ़ाने वाला, जीडीपी में योगदान करने वाला, विदेशी मुद्रा कमाने वाला और रोजगार सृजन का प्रमुख ईंजन है, लेकिन वैश्विक रूझानों के अऩुरूप 2018 और 2019 में विदेशी मुद्रा आय वृद्धि में नरमी आई। ई-वीजा योजना को 169 देशों के साथ उदार बनाए जाने से ई-वीजा पर पर्यटकों का आगमन 2015 के 4.45 लाख विदेशी पर्यटकों की तुलना में 2018 में बढ़कर 23.69 लाख हो गया और यह जनवरी-अक्टूबर 2019 में 21.75 लाख रहा। इस तरह इसमें प्रति वर्ष 21 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई।
  • आईटी-बीपीएम सेवाः भारत का आईटी-बीपीएम उद्योग पिछले दो दशकों से भारत के निर्यात का ध्वजवाहक रहा है। आईटीबीपीएम उद्योग मार्च 2019 में 177 बिलियन डॉलर हो गया। रोजगार वृद्धि और मूल्यवर्धन के माध्यम से यह क्षेत्र अर्थव्यवस्था में महत्वपूर्ण योगदान करता है। आईटी-बीपीएम क्षेत्र में नवाचार को प्रेरित करने तथा प्रौद्योगिकी को अपनाने के लिए अनेक कदम उठाए गए हैं। इन कदमों में स्टार्टअप इंडिया, राष्ट्रीय सॉफ्टवेयर, उत्पाद नीति और एंजिल टैक्स से संबंधित विषयों की समाप्ति शामिल है। भारत की स्टार्टअप व्यवस्था प्रगति कर रही है और 24 यूनिकॉर्न के साथ यह विश्व में तीसरी सबसे बड़ी व्यवस्था बन गई है।
  • बंदरगाह तथा जहाजरानी सेवाः जहाजों से माल उतारने और चढ़ाने में लगने वाला समय दक्षता का प्रमुख सूचक है। यह 2010-11 तथा 2018-19 के बीच आधा घटकर 4.67 दिवस से 2.48 दिवस हो गया है।
  • अंतरिक्ष क्षेत्रः पांच वर्ष पूर्व प्रारम्भिक शुरूआत के बाद से भारत के अंतरिक्ष कार्यक्रम में काफी प्रगति हुई है। अब साधारण मैपिंग सेवाओं से आगे अधिक सेवाएं मिल रही हैं। यद्पि अन्य देशों की तुलना में अंतरिक्ष कार्यक्रम पर भारत का खर्च कम है, लेकिन इसरो ने हाल के वर्षों में प्रति वर्ष लगभग 5-7 सेटेलाइटों को बिना किसी दोष के लान्च किया है।

अपने महत्व को बढ़ाते हुए सेवा क्षेत्र अर्थव्यवस्था तथा सकल मूल्यवर्धन (जीवीए) वृद्धि में लगभग 55 प्रतिशत हो गया है। भारत में कुल दो-तिहाई प्रत्यक्ष विदेशी निवेश आवक हुई है और यह क्षेत्र कुल निर्यात का 38 प्रतिशत हो गया है। यह जानकारी आज केन्द्रीय वित्त तथा कॉरपोरेट कार्य मंत्री श्रीमती निर्मला सीतारमण द्वारा संसद में प्रस्तुत आर्थिक समीक्षा 2019-20 में दी गई है। 33 राज्यों तथा केन्द्रशासित प्रदेशों में से 15 में इस क्षेत्र की हिस्सेदारी सकल राज्य मूल्यवर्धन के 50 प्रतिशत को पार कर गई है।

आर्थिक समीक्षा में बताया गया है कि अप्रैल-सितंबर 2019 के दौरान सेवा क्षेत्र ने कुल एफडीआई इक्विटी आवक में 33 प्रतिशत की छलांग लगाई है और यह आवक 17.58 बिलियन डॉलर पहुंच गई है। ऐसा सूचना तथा प्रसारण, विमान परिवहन, दूर-संचार, परामर्श सेवाओं तथा होटल और पर्यटन जैसे उप-क्षेत्रों में मजबूत एफडीआई आवक के कारण हुआ है।

आर्थिक समीक्षा में रेखांकित किया गया है कि हाल के वर्षों में वस्तुओं के निर्यात से अधिक सेवाओं का निर्यात हुआ है। इस कारण विश्व की वाणिज्यिक सेवा निर्यात में भारत की हिस्सेदारी पिछले दशकों में बढ़ी है और यह 2018 में 3.5 प्रतिशत पर पहुंच गई है। यह विश्व के 1.7 प्रतिशत वाणिज्यिक निर्यात से दोगुना है।

बजट पूर्व समीक्षा में कहा गया है कि उच्च फ्रीक्वेंशी वाले विभिन्न संकेतक तथा विमान यात्री यातायात, रेल माल ढुलाई यातायात, बंदरगाह और जहाजरानी माल ढुलाई यातायात, बैंक ऋण, आईटी-बीपीएम (बिजनेस प्रोसेस मैनेजमेंट) क्षेत्र राजस्व, विदेशी पर्यटक आगमन तथा पर्यटन विदेशी मुद्रा आय जैसे क्षेत्रवार डाटा बताते हैं कि 2019-20 के दौरान सेवा क्षेत्र में नरमी आई है। लेकिन अच्छी बात यह है कि 2019-20 के प्रारंभ में सेवा क्षेत्र में विदेशी प्रत्यक्ष निवेश (एफडीआई) में सुधार हुआ है और अप्रैल-सितंबर 2019 के दौरान सेवा निर्यात की गति तेज बनी रही है। समीक्षा में दीर्घकालिक दृष्टि से सुझाव दिया गया है कि द्विपक्षीय व्यापार वार्ताओं के दौरान सेवा निर्यात पर फोकस करना भारत के लिए व्यापार साझेदारों के साथ द्विपक्षीय व्यापार घाटे को दूर करने के लिए शुभ है।

आर्थिक समीक्षा में सेवा क्षेत्र के अंदर उप-क्षेत्रों के महत्वपूर्ण विकासों को दिखाया गया हैः

  • पर्यटन सेवाः  यह क्षेत्र विकास को बढ़ाने वाला, जीडीपी में योगदान करने वाला, विदेशी मुद्रा कमाने वाला और रोजगार सृजन का प्रमुख ईंजन है, लेकिन वैश्विक रूझानों के अऩुरूप 2018 और 2019 में विदेशी मुद्रा आय वृद्धि में नरमी आई। ई-वीजा योजना को 169 देशों के साथ उदार बनाए जाने से ई-वीजा पर पर्यटकों का आगमन 2015 के 4.45 लाख विदेशी पर्यटकों की तुलना में 2018 में बढ़कर 23.69 लाख हो गया और यह जनवरी-अक्टूबर 2019 में 21.75 लाख रहा। इस तरह इसमें प्रति वर्ष 21 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई।
  • आईटी-बीपीएम सेवाः भारत का आईटी-बीपीएम उद्योग पिछले दो दशकों से भारत के निर्यात का ध्वजवाहक रहा है। आईटीबीपीएम उद्योग मार्च 2019 में 177 बिलियन डॉलर हो गया। रोजगार वृद्धि और मूल्यवर्धन के माध्यम से यह क्षेत्र अर्थव्यवस्था में महत्वपूर्ण योगदान करता है। आईटी-बीपीएम क्षेत्र में नवाचार को प्रेरित करने तथा प्रौद्योगिकी को अपनाने के लिए अनेक कदम उठाए गए हैं। इन कदमों में स्टार्टअप इंडिया, राष्ट्रीय सॉफ्टवेयर, उत्पाद नीति और एंजिल टैक्स से संबंधित विषयों की समाप्ति शामिल है। भारत की स्टार्टअप व्यवस्था प्रगति कर रही है और 24 यूनिकॉर्न के साथ यह विश्व में तीसरी सबसे बड़ी व्यवस्था बन गई है।
  • बंदरगाह तथा जहाजरानी सेवाः जहाजों से माल उतारने और चढ़ाने में लगने वाला समय दक्षता का प्रमुख सूचक है। यह 2010-11 तथा 2018-19 के बीच आधा घटकर 4.67 दिवस से 2.48 दिवस हो गया है।
  • अंतरिक्ष क्षेत्रः पांच वर्ष पूर्व प्रारम्भिक शुरूआत के बाद से भारत के अंतरिक्ष कार्यक्रम में काफी प्रगति हुई है। अब साधारण मैपिंग सेवाओं से आगे अधिक सेवाएं मिल रही हैं। यद्पि अन्य देशों की तुलना में अंतरिक्ष कार्यक्रम पर भारत का खर्च कम है, लेकिन इसरो ने हाल के वर्षों में प्रति वर्ष लगभग 5-7 सेटेलाइटों को बिना किसी दोष के लान्च किया है।
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