13 बिसवा जमीन को लेकर पूर्व सांसद व पूर्व मंत्री आये आमने-सामने

मंगलम मैरिज हाल की जमीन का दावा ठोक रहे दोनों नेता
जेसीबी से पूर्व सांसद ने गिरवाई बाउण्ड्री, पूर्व मंत्री ने मांगा न्यायालय का आदेश
 पूर्व मंत्री से बातचीत करते शहर कोतवाल रवीन्द्र श्रीवास्तव
फतेहपुर। शहर के पाश इलाके पथरकटा चौराहा सिविल लाइन स्थित मंगलम मैरिज हाल की 13 बिसवा जमीन का विवाद थमने का नाम नहीं ले रहा है। दो वर्ष बाद एक बार फिर इस जमीन को लेकर सपा के वरिष्ठ नेता एवं पूर्व सांसद अशोक पटेल व बसपा के पूर्व मंत्री अयोध्या प्रसाद पाल आमने-सामने आ गये। मंगलवार को पूर्व सांसद इस जमीन पर कब्जा करने के लिए अपने समर्थकों संग पहुंचे। तभी इसकी जानकारी पूर्व मंत्री को लग गयी। वह भी तत्काल मौके पर पहुंचे और दोनों नेताओं के बीच तनातनी का माहौल हो गया। सूचना पर पहुंची पुलिस ने मामले को शांत कराते हुए जेसीबी को वापस करवा दिया। पूर्व मंत्री ने न्यायालय का आदेश मांगा। जिसको पूर्व सांसद नहीं दिखा सके। वहीं पूर्व सांसद का दावा का है कि न्यायालय ने उन्हें मालिकाना हक का आदेश दे दिया है। जिसके तहत वह कब्जा करने के लिए गये थे।
बताते चलें कि पथरकटा चौराहा सिविल लाइन स्थित मंगल मैरिज हाल की 13 बिसवा जमीन को लेकर पूर्व सांसद डा0 अशोक पटेल एवं पूर्व मंत्री अयोध्या प्रसाद पाल के बीच तनातनी चली आ रही है। इस भूमि पर पूर्व मंत्री मैरिज हाल का संचालन कर रहे थे। जब पूर्व सांसद ने इस भूमि पर अपना दवा ठोंका तो मैरिज हाल का संचालन बंद हो गया था। पूर्व मंत्री ने अधिकारियों के साथ-साथ न्यायालय के दरवाजे खटखटाये थे। मंगलवार को दो वर्ष बाद अचानक पूर्व सांसद अशोक पटेल अपने समर्थकों व जेसीबी मशीन के साथ 13 बिसवा जमीन पर कब्जा करने पहुंचे और मैरिज हाल के पिछले हिस्से में खड़ी बाउण्ड्रीवाल को गिराने का कार्य शुरू कर दिया। जब इसकी जानकारी पूर्व मंत्री अयोध्या प्रसाद पाल को हुयी तो वह भी तत्काल मौके पर पहुंचे और दोनों नेताओं के बीच तनातनी शुरू हो गयी। मामले की जानकारी होने पर कोतवाली प्रभारी रवीन्द्र श्रीवास्तव व कचेहरी चौकी इंचार्ज पुलिस बल के साथ मौके पर पहुंचे और कार्य को रूकवाते हुए दोनों पक्षों के बीच मामले को शांत कराया। पूर्व मंत्री ने न्यायालय का आदेश मांगा तो पूर्व सांसद आदेश नहीं दिखा सके। उधर पूर्व सांसद का कहना रहा कि इस भूमि का बैनामा उन्होने अपने व पत्नी के नाम करवाया था लेकिन इस पर पूर्व मंत्री ने अपना कब्जा कर रखा है। मालिकाना हक पाने के लिए न्यायालय में मुकदमा चल रहा था। विद्वान न्यायाधीश ने उन्हें मालिकाना हक का आदेश दे दिया है जिसके चलते ही वह कब्जा करने यहां आये हैं। उधर पूर्व मंत्री का कहना रहा कि यह भूमि उनकी है। जिसका बैनामा भी उनके पास है। विवाद का मुकदमा न्यायालय में विचाराधीन है। कोर्ट की नोटिस व न्यायालय आदेश मिलने पर वह स्वयं ही भूमि को खाली करवा देंगे।

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