स्वच्छ भारत मिशन को पलीता लगा रही नगर पालिका

विभाग की मिली भगत से आधा सैकडा कर्मचारी घर बैठे ले रहे वेतन

फतेहपुर। प्रधान मंत्री नरेन्द्र मोदी के स्वच्छ भारत अभियान को नगर पालिका परिषद का सफाई विभाग पलीता लगाने में जुटा है। शहर की घनी आबादी के बीच कूडों के ढेर तथा बज-बजाती नालियां बीमारियो को न्योता दे रही है। सफाई विभाग की मिली भगत से आधा सैकडा से अधिक कर्मचारी घर बैठे वेतन उठा रहे है। ऐसे कर्मचारियो को विभागीय अधिकारियो को तीन हजार से पांच हजार मासिक की चढौती चढाना पड रही है। जब कि सफाई के नाम पर पालिका प्रशासन द्वारा वाहन सहित ठेला गाडियों पर लाखो रूपये की धनराशि खर्च होना दर्शाया जा रहा है।

     बताते चले कि नगर पालिका परिषद में स्थायी सफाई कर्मचारियो के अलावा संविदा पर भी सैकडों कर्मचारी तैनात है। पालिका परिषद के 34 वार्डो में कई वार्ड ग्रामीण क्षेत्रो में आते है। सफाई व्यवस्था के लिये पालिका प्रशासन द्वारा जहां लाखो रूपये की पगार दी जा रही है। वही सफाई के नाम पर संसाथनो की खरीद पर भी लाखो के वारे न्यारे किये जा रहे है। वडी संख्या मे तैनात कर्मचारियो की फौज शहर को स्वच्छ रखने में पूरी तरह से नाकाम साबित हो रही है। जगह-जगह कूडे के ढेर व बज-बजाती नालियां स्वच्छ भारत मिशन को मुंह चिढा रहा है। गन्दगी के अम्बार के चलते सक्रामक बीमारियां दस्तक दे रही है। जिनके चलते नाना प्रकार की बीमारियो से लोग ग्रस्त है। बिडम्बना यह है कि नगर पालिका परिषद में प्रभारी के पदों को खुटियो की तरह बाटा जा रहा है। अधिकांश लिपिक प्रभारी के रूप में अधिकारी बनकर सफाई कर्मियों का शोषण करने में जुटे है। जब कि सफाई निरीक्षक का पद सृजित है। लेकिन प्रभारियों के आगे सफाई निरीक्षक का पद बेमतलब साबित हो रहा है। सूत्रो का कहना है कि सफाई व्यवस्था की दुर्दषा के पीछे खाऊ-कमाऊ नीति मुख्य कारण है। सूत्रो का यह भी कहना है कि आधा सैकडा सफाई कर्मी घर बैठे वेतन उठा रहे है। इनमे ंसे कई कर्मचारी सफाई विभाग के अधिकारियो के परिवारो से जुडे हुये है। घर बैठने वाले कर्मचारियो से तीन से पांच हजार रूपये की दस्तूरी वसूली जा रही है।

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