सीएम की घोषणा के बाद पैदल व ट्रकों में प्रवासियों का लौटना जारी

सिर पर गृहस्थी, हाथों में मासूम की उंगलियां पकड़े सैकड़ां किमी की राह
औरैया जनपद की घटना के बाद भी प्रशासन ने नहीं लिया सबक
हाईवे पर पैदल अपने गन्तव्य को जाते प्रवासी एवं ट्राला में सवार लोग
फतेहपुर। सिर पर गृहस्थी का बोझ हाथों में मासूम बच्चे का हाथ साथ में चल रही महिला के गोद मे नौनिहाल बच्चा यह मजदूरों का एक झुंड है जो हरियाणा से जौनपुर के सस्ते की ओर है। तंगी और साधन न मिलने के कारण पैदल ही अपने गांव वापस लौटने को मजबूर है। तस्वीर हर किसी के दिल को दहला देने के लिये काफी है। लॉकडाउन में रोजी रोटी ठप हो जाने की वजह से पलायन करने वाले मजदूरों का हाइवे से ट्रकों व पैदल ही गांव की ओर जाने का सिलसिला थमता नजर नहीं आ रहा है। महाराष्ट्र के औरंगाबाद के बाद प्रदेश के औरैया जनपद में मजदूरों के सबसे बड़ी घटना घटने के बाद भी जनपद में प्रवासी मजदूरों की इस तरह वापसी रोकने के लिये कोई कदम नहीं उठाये जा रहे हैं। महाराष्ट्र के बाद औरैया जनपद में मजदूरों के साथ हुई घटना मे 2 दर्जन से अधिक मजदूरों की मौत हुई है। घटना के बाद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ द्वारा प्रदेश सीमा में मजदूरों के दाखिल होते ही उन्हें भोजन व पानी उपलब्ध कराए जाने के साथ ही उनके जाने के लिये रोडवेज बसों की व्यवस्था किये जाने का निर्देश जारी किया गया। सीएम ने सभी थाना प्रभारियों को अपने अपने थाना क्षेत्र में पैदल या भार ढोने वाले साधनों से जा रहे मजदूरों को रोक कर उन्हें बसों के जरिए ही उनके गंतव्यों तक भेजे जाने की व्यवस्था करने के निर्देश दिया है। यहां तक कि बाइक से जाने वाले प्रवासियों की सुरक्षा को देखते हुए उन्हें भी साधन उपलब्ध कराने की बात कही है। सीएम की घोषणा के बाद भी हाइवे से पैदल व ट्रकों के जरिए प्रवासियों का लौटने का सिलसिला थमता हुआ नजर नहीं आ रहा। हाइवे में डीसीएम, ट्रकों, ट्रालो समेत अन्य भर ढोने वाले साधनों में जान जोखिम में डालकर गांव लौटने वाले मजदूरों को देखा जा सकता है। वापस लौटने वाले मजदूरों के पास न तो इतने पैसे होते है कि वह अपना पेट भर सके न ही हाइवे पर दुकाने खुली है। जहां से वह अपने बच्चों के लिये कुछ खरीद सके। ऐसे में उन्हें यदि किसी समाजिक संगठन के लोगो से कुछ मदद मिल गयी तो ठीक नही तो भूखे पेट ही रास्ता तय करना होता है। पैदल चलने वाले प्रवासियो मजदूरों की हालत तो और भी खराब है। सैकड़ो किलोमीटर की यात्रा पर निकले इन मजदूरों के पास न तो खुद खाने के लिय कुछ है न ही अपने बच्चों के लिये। मंजिल की तरफ चलते हुए किसी राहगीर या समाजसेवी ने यदि खाने को कुछ दिया तो उसे खुद न खाकर उसे बच्चों के लिये बचाकर रख देते है और भूखे पेट ही जल्द से जल्द गांव पहुंच जाना चाहते है। रोजी रोटी की तलाश में कभी महानगरों को गये मजदूर लॉकडाउन के कारण वापस लौटने पर मजबूर है। तंगहाली के कारण मजदूर साइकिल बाइक से लेकर पैदल यात्रा करने पर मजबूर है। सीएम की घोषणा के बाद भी मजदूरों का इस तरह लौटने का सिलसिला न थमना कही न कहीं सरकारी व्यवस्थाओं पर सवालिया निशान लगाता है।

0Shares
Total Page Visits: 211 - Today Page Visits: 1

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *