सीएए को वापस लिये जाने की मांग को लेकर मुस्लिम धर्मगुरू आये आगे

डीएम के जरिये राष्ट्रपति को भेजा ज्ञापन
डीएम को ज्ञापन सौंपते मुस्लिम धर्मगुरू
फतेहपुर। नागरिकता संशोधन बिल पास होने के बाद से लगातार विरोध के स्वर मुखर हो रहे हैं। जहां मुस्लिम समुदाय के साथ-साथ अन्य समुदाय के लोगों ने इसका पुरजोर विरोध किया है वहीं अब मुस्लिम धर्मगुरू ने भी इस बिल को वापस लिये जाने की मांग को लेकर आगे आ गये हैं। शुक्रवार को पीस कमेटी की बैठक के बाद राष्ट्रपति को सम्बोधित एक ज्ञापन जिलाधिकारी को सौंपकर सीएए को तत्काल वापस लिये जाने की मांग उठायी।
काजी-ए-शहर मौलाना कारी फरीद उद्दीन कादरी व शहरकाजी अब्दुल्ला शहीदुल इस्लाम की अगुवई में मुस्लिमों ने कलेक्ट्रेट स्थित सभागार में आयोजित पीस कमेटी की बैठक समाप्त होने के बाद राष्ट्रपति को सम्बोधित एक ज्ञापन जिलाधिकारी को सौंपा। जिसमें कहा गया कि हिन्दुस्तान एक लोकतांत्रिक देश है। इस देश के संविधान ने यहां के हर बाशिन्दे को पूर्ण स्वतंत्रता के साथ अपने-अपने धर्म और जाति को जीवन यापन करने का अधिकार दिया है। लेकिन मरकजी हुकूमत ने संविधान के खिलाफ बिल पास करके हिन्दुस्तान के लोगों को धर्म की बुनियाद पर बांटने की कोशिश की है। सरकार का यह कदम हिन्दुस्तान के संविधान दफा 14, 15 के खिलाफ है और इस कानून को बनाने के लिए हिन्दुस्तान के संविधान का ख्याल भी नहीं रखा गया है। घमण्ड में चूर मरकजी हुकूमत यह भी भूल गयी कि यह मुल्क महात्मा गांधी के उसूलों और संविधान के मोताबिक चलने वाला मुल्क है। राष्ट्रपति से मांग किया कि हुकूमत को मवशिरा दे कि इस बिल को वापस लिया जाये ताकि हिन्दुस्तान के हालात बेहतर हो सके। इस मौके पर धर्मगुरूओं के साथ मौलाना अब्दुल जीमल, शफीकुल गफ्फरार एडवोकेट, मौलाना कारी शारिक, हाजी फरीद अहमद, इफ्तेखार अहमद, शोएब खान एडवोकेट, चौधरी मंजर यार, आसिफ राईन, आरिफ, चौधरी मोईन राईन, गुड्डू चौधरी राईन आदि मौजूद रहे।

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