लॉक डाउन : गरीब राम नारायण दूसरों से मांग कर गरीबों का भर रहे पेट

खुद मुफलिसी का जीवन जीने वाले में समाजसेवा का गजब का हौसला
पुलिस, विद्युत, स्वास्थ्य मीडिया एवं सफाई कर्मियों को पानी के बोतल देकर करते उत्साहवर्धन
मिनरल वाटर की बोतल लेकर साइकिल से जाते राम नारायण।
फतेहपुर। कोरोना संक्रमण से बचने के लिये देश भर में हुए लॉक डाउन के दौरान जहां सभी लोग अपने अपने घरो में रह रहे हैं वहीं जनता की सेवा में मुस्तैद व आपातकालीन सवाओ में लगे हुए पुलिस, स्वास्थ्य, सफाई एव विद्युत कर्मियों एव गरीब परिवारों के भूख की चिंता बेहद मुफलिसी का जीवन जीने वाले आचार्य राम नारायण करते हुए दिखाई दे रहे है। आचार्य राम नारायण इन लोगो के लिये अपनी साइकिल पर लंच पैकेट व कॅरियल पर पानी की बोतल का गत्ता रखकर सुबह से ही निकल पड़ते है। गरीब परिवारों में लंच पैकेट देकर उनकी भूख मिटाते है। जबकि सड़को चौराहों पर ड्यूटी में मुस्तैद पुलिस कर्मियो समेत आपातकालीन सवाओ में लगे लोगो को भी लंच पैकेट व पानी की बोतल देकर उनका उत्साह वर्धन करते है। बेहद गरीब परिवार से आने वाले आचार्य राम नारायण यूं तो खुद मुफलिसी का जीवन जी रहे है। दुकानों पर मामूली खान पान की चीजों को पहुंचाने का काम करते है। लेकिन समाजसेवा की लगन ऐसी की खुद के पेट न भरकर लगभग एक दशक से गरीब परिवारों व मलिन बस्तियों में रहने वाले बच्चो को जाकर निशुल्क पढ़ा रहे है। लॉक डाउन हो जाने के बाद बच्चो के पढ़ाने व दुकाने बन्द होने से घर पर ही थे। गरीब परिवारों के भूखे प्यासे होने की बात सुनकर राम नारायण से रहा नही गया। और वह कोरोना संक्रमण से बचने के लिये अपने मुंह पर रुमाल बांधकर साइकिल से समाजसेवा के लिये निकल पड़े। पूछने पर राम नारायण ने बताया कि वह तो खुद गरीब है। समाज के ही लोगो से जो आर्थिक सहयोग मिल जाता है। उसी से लोगों को राहत दिलाने की कोशिश करते है। उनके सेवा भाव को देखते हुए समाज मे बड़ी हस्तियां रखने वाले दानवीर लोग भी मुफलिसी का जीवन जीने वाले आचार्य राम नारायण के हौसले के आगे बौने नजर आते है।

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