लाकडाउन 3.0 : किराया देकर सूरत से लौटे 1215 मजदूर

 रेलवे स्टेशन में थर्मल स्क्रीनिंग के बाद ब्लाकवार बसों में बिठाये गये यात्री
प्रत्येक यात्री को लंच पैकेट, पानी की बोतल व मास्क कराया गया मुहैया
 रेलवे स्टेशन से बाहर आते प्रवासी मजदूर
फतेहपुर। चीन के वुहान शहर से निकले वायरस का कहर जहां दुनिया भर के लगभग दो सौ देशों में तबाही मचा रहा है। वहीं अपना देश भी इससे अछूता नहीं है। देश में अब तक संक्रमित मरीजों की संख्या 56000 जहां पार कर गयी है वही लगभग 1900 लोग मौत के मुंह में समा चुके हैं। प्रथम लाकडाउन करके संक्रमण रोकने का केन्द्र सरकार ने तरीका निकालते हुए पूरे देश को 25 मार्च से लाकडाउन कर दिया था। लाकडाउन के दौरान जनपद सहित आस-पास के जिलों के लगभग 1215 मजदूर व उनके परिवार को सूरत से विशेष ट्रेन लेकर स्थानीय स्टेशन पहुंची। प्रशासन द्वारा आने वाले मजदूरों का स्वास्थ्य परीक्षण के साथ-साथ खाने व पीने की व्यवस्था पहले से ही सुनिश्चित कर ली गयी थी। थर्मल स्क्रीनिंग के बाद बाहर निकले अधिकांश यात्रियां ने जहां अपने वतन लौटने पर खुशी का इजहार किया वहीं आठ सौ रूपये प्रति व्यक्ति किराया अदा करने की बात भी स्वीकार की।
बताते चलें कि लाकडाउन 3.0 को लागू करने से पहले केन्द्र सरकार ने तमाम रियायतों की घोषणा करके राज्य सरकारों से अमल करने का निर्देश दिया था। प्रदेश की योगी सरकार लाकडाउन में फंसे प्रदेश के कामगारों को परिवार सहित लाने का ऐलान कर चुकी है। इसी के तहत सर्वाधिक संक्रमण व मौतों के मामलों में देश में दूसरे नम्बर के राज्य गुजरात के सूरत जनपद से जिले के लोगों को लाने के लिए गुरूवार की सुबह छह बजे स्पेशल ट्रेन चलायी गयी थी। इस पर सवार 1215 मजदूर व उनके परिवार के लोग शुक्रवार की शाम चार बजे रेलवे स्टेशन पर उतार लिये गये। इन मजदूरों के साथ नन्हे-मुन्ने बच्चे व महिलाएं भी शामिल हैं। ट्रेन के आगमन से पहले ही प्लेटफार्म सहित स्टेशन के बाहरी परिसर को छावनी में तब्दील कर दिया गया था। जैसे ही ट्रेन प्लेटफार्म पर रूकी प्रशासन के लोग सक्रिय हो गये। बोगियों से उतरने वाले सभी मजदूरों को प्लेटफार्म पर बनाई गयी दो लाइनों में खड़ा करके स्वास्थ्य विभाग की टीम ने सभी की थर्मल स्क्रीनिंग की। तत्पश्चात एक बोतल पानी, लंच पैकेट व मास्क प्रत्येक परिवार को सदस्यों सहित उपलब्ध कराया गया। ध्वनि विस्तारक यंत्र से लगातार शारीरिक व सामाजिक दूरी बनाये रखने का ऐलान करने के साथ ही सम्बन्धित ब्लाक की बसों में बैठने के लिए आवाज लगायी जा रही थी। एक-एक करके यात्री प्लेटफार्म से बाहर आये और अपने-अपने गांव में आने वाले ब्लाकों वाली बसों पर बैठते रहे। बाहर निकले कई मजदूरों ने अपने वतन लौटने पर खुशी तो जाहिर की लेकिन उनकी पीड़ा इस बात को दर्शा रही थी कि उन्हें आठ-आठ सौ रूपये किराया देकर यहां आना पड़ा है। जबकि केन्द्र व प्रदेश सरकारें लगातार गैर प्रान्तों में फंसे यात्रियों को निःशुल्क लाने का प्रचार करते नहीं थक रही हैं। अमौली विकास खण्ड के ग्राम कृपालपुर के बलराम व अमित ने बताया कि यहां तक आने के लिए आठ-आठ सौ रूपये का उन्हें नकद भुगतान देना पड़ा है। इसी प्रकार बहुआ विकास खण्ड के कोर्रा कनक गांव के राम प्रकाश, असोथर विकास खण्ड के ग्राम जिवकरा के रोहित व दसौली गांव के रामबरन, टीकर गांव के सुनील परिवार सहित यहां आये हैं। सभी ने बताया कि उनसे ट्रेन का आठ-आठ सौ रूपये किराया वसूला गया है। इसके अलावा लगभग 34 घण्टे के सफर में पेट भर भोजन भी नहीं मुहैया कराया गया। यहां लौटे अधिकांश कामगार मजदूरों ने कहा कि सरकार निःशुल्क लाने का प्रचार कर रही है। जबकि 22 मार्च से सभी लोग लाकडाउन के चलते वहां फंसे हुए थे। लाकडाउन में रोजगार देने वाले कारखाने भी बंद हो चुके थे। ऐसे में उनके सामने छोटे-छोटे बच्चों के पेट भरने के लाले पड़े हुए थे। अपने वतन लौटकर अब वह सुकून महसूस कर रहे हैं।
स्पेशल ट्रेन के आने की सूचना मिलते ही जिलाधिकारी संजीव सिंह, पुलिस अधीक्षक प्रशांत वर्मा, मुख्य विकास अधिकारी सत्य प्रकाश सहित अधीनस्थ अधिकारी प्लेटफार्म व प्लेटफार्म के बाहर व्यवस्थाओं को देखते रहे। बड़ी संख्या में पुलिस के जवान छावनी के रूप में मुस्तैद दिखे। जिलाधिकारी ने बताया कि आये सभी मजदूरों की रेलवे स्टेशन के प्लेटफार्म पर थर्मल स्क्रीनिंग कराने के बाद ही ब्लाकवार बसों में सवार किया गया है। सभी लोगों को ब्लाकवार बनाये गये आश्रय स्थलों पर क्वारंटीन किया जायेगा। उन्होने यह भी बताया कि जनपद के अलावा इस ट्रेन से अगल-बगल के जनपदों के भी एक सैकड़ा लोग शामिल हैं। क्वारंटीन की अवधि समाप्त होने के बाद ही गैर जनपद के अलावा अपने जिले के सभी लोगों को घर भेजने की व्यवस्था की जायेगी।

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