रातों में जाग – जाग कर किसान कर रहे हैं अपने फसलों की रखवाली

रातों में जाग – जाग कर किसान कर रहे हैं अपने फसलों की रखवाली

प्रयागराज हड्डी को गला देने वाली शीत लहरी में किसान आवारा पशुओं और लीयगाय से अपनी खेती बचाने के लिए रात को खेत की रखवाली कर रहे हैं किसान खटमैरा पर भयंकर ठंडी में रहकर रात बिताने को मजबूर है क्षेत्र के घूरपुर दलवाबारी बीकर सारीपुर देवरिया मनकवार गडरिन तारा  चक सेमरा करमा गौहनिया आदि सैकड़ों गांव में किसान टमाटर आलू मटर बैंगन मूली पालकी प्याज की खेती बहुतायत किए हैं लेकिन आवारा मवेशी और नीलगाय किसानों की नाक में दम कर दिया है पशुओं का झुंड खेत में पहुंचकर किसानों की हाड तोड़ मेहनत को पल भर में चट कर दे रहे हैं इससे इलाके के किसान हड्डी को गला देने वाली ठंड में अपने खेतों में खटमैरा बनाकर उसमें रात निवास करके रात जगा कर खेती की रखवाली कर रहे हैं पूस की भयंकर ठंड में अपनी फसल की रखवाली करना उनकी मजबूरी बन गई है क्योंकि मौका पाते ही पशुओं का झुंड खेत में पहुंचकर उनकी फसल को बर्बाद कर दे रहे हैं  दलवाबारी गांव में खटमैरा पर रात निवास कर अपनी फसल की रखवाली कर रहे  शेर बहादुर सिंह पंडित यादव प्रेमचंद यादव विकास यादव रामजतन यादव धर्मराज यादव आदि किसानों ने बताया कि आवारा पशु और नीलगाय सबसे ज्यादा साग सब्जी की खेती पर हमला करते हैं अगर रखवाली ना किए जाए तो झुंड पल भर में फसल को चट करने के साथ रौंदकर बर्बाद कर दे उसी प्रकार दलवाबारी गांव के किसान दयाराम यादव पप्पू यादव बाबूलाल यादव आदि किसान बताते हैं कि आवारा पशु आलू की खेती को रौंदकर बर्बाद कर रहे हैं जिसकी वजह रतजगा कर रखवाली करना मजबूरी बन गया है करमा गांव के  रमेश पटेल को कहना है कि नील गांव का सबसे पसंदीदा आहार साग सब्जी की खेती है सबसे ज्यादा बैगन पालकी टमाटर गोभी को खाते हैं ऐसे में पूस की रात में पेट के लिए रतजगा करने को मजबूर हैं किसान!
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