मच्छरजनित बीमारियों का प्रकोप बढ़ा, गरीब बेहाल…

मच्छरजनित बीमारियों का प्रकोप बढ़ा, गरीब बेहाल
फतेहपुर। शहर सहित ग्रामीणांचलों में मच्छरजनित घातक बीमारियांे ने तेजी से पैर पसारना शुरू कर दिया है। चिकित्सकों के क्लीनिकों पर मौसमी रोगों के शिकार लोगों की कतारें लगी हुई है। वहीं ग्रामीणांचलों में झोलाछाप चिकित्सकों की पौबारह हो रही है, परन्तु जनपद का स्वास्थ्य विभाग चैन की नींद सो रहा है। विभाग के आला अधिकारी भी संक्रामक रोगों की रोकथाम की दिशा में कोई ठोस पहल नहीं कर पा रहे हैं जिससे गरीब मरीजों का बुरा हाल है। शहर की मलिन बस्तियों व देहात क्षेत्र में मच्छरों का भारी प्रकोप है। साफ सफाई व डीडीटी का छिड़काव बरसात के पूर्व न कराये जाने से घातक मच्छरों की तादात दिनों दूरी रात चैगुनी बढ़ती जा रही है इसलिए प्रतिदिन सैकड़ों लोग मच्छरजनित मलेरिया, वायरल फीवर, मस्तिष्क ज्वर जैसे संक्रामक रोगों के शिकार हो रहे हैं। निजी चिकित्सकों के क्लीनिक पर उपरोक्त रोगों से पीड़ितों की कतार दिन पर दिन लम्बी होती जा रही है।
ऐसे में शहर के गली मोहल्ले व ग्रामीण इलाकों में झोलाछाप चिकित्सकों की पौबारह हो रही है। बगैर डिग्री डिप्लोमा धारी ये चिकित्सक मरीजों के अभिभावकों की जेबों में खुलकर डाका डाल रहे है। वहीं सरकारी अस्पतालों व प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों की स्थित बेहद खराब है। यहां जब मरीज पहुंचता है तो वहीं मिलती और कहीं दवायें मिल जाती है तो चिकित्सक नदारत मिलते हैं। स्वास्थ्य महकमे की इस लापरवाही का ही भरपूर फायदा झोलाछाप डाक्टर उठा रहे हैं और इनके उपचार से मरीज भी जल्दी ठीक नहीं हो रहे हैं। इस बावत चिकित्सकों का कहना है कि विगत वर्षों में बरसात के मौसम में अधिकांश मलेरिया तथा वायरल के रोगी ही उनके पास आते थे, लेकिन अब दिमागी बुखार गर्दन तोड़ बुखार और डेंगू, चिकनगुनिया ज्वर के शिकार लोगों की भी संख्या में इजाफा हो रहा है। एक ओर जनपद में प्रतिदिन सैकड़ों लोग मच्छरजनित घातक रोगों का शिकार हो रहे हैं। वहीं जनपद का स्वास्थ्य विभाग चैन की नींद सो रहा है। जनपद में मच्छरों की रोकथाम का जिम्मा विभाग के मलेरिया उन्मूलन विभाग का है जो कि खुद मलेरिया ग्रस्त होकर रह गया है।

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