बुद्ध जयन्ती पर कोरोना से निजात दिलाने की हुयी प्रार्थना

 भगवान बुद्ध के चित्र पर पुष्प अर्पित करते अनुयायी
फतेहपुर। डा0 बाबा साहब अम्बेडकर मिशन भारत के तत्वाधान में तथागत भगवान गौतम बुद्ध के 2583 वें जन्मोत्सव महापर्व को अनुयायियों ने श्रद्धा के साथ मनाया। उनके तैलीय चित्र के समक्ष मोमबत्ती, धूपबत्ती, अगरबत्ती जलाकर बुद्ध वंदना व पंचशील का अनुकरण कर पुष्प अर्पित करके श्रद्धासुमन अर्पित किये गये। वक्ताओं ने प्रार्थना सभा में विश्व में कोरोना जैसी महामारी से जनजीवन की जान बचाने के लिए भगवान बुद्ध से प्रार्थना की।
महापर्व पर संगठन के जिला सचेतक रमेश बौद्ध ने कहा कि तथागत भगवान गौतम बुद्ध के जन्म के वक्त देश में तमाम कुरीतियां थी। जो समाज को खोखला करने का काम कर रही थीं। लेकिन गौतम बुद्ध ने अपने संदेश के जरिये बुराईयों को दूर करने का प्रयास किया। उन दिनों वैदिक परम्परा में यज्ञ की प्रथा थी। यज्ञ में अकाल एवं महामारी को दूर करने के नाम पर हजारों पशुओं की बलि दी जाती थी। करूणा के सागर भगवान बुद्ध ने इस काम को अधर्म कहा। उनके अनुसार ईश्वर कभी भी अपनी संतान की बलि नहीं मांगता। समाज में धीरे-धीरे यह प्रथा कम हो गयी। बुद्ध ने समाज में फैले सभी विकारों के समाधान का एक ही रास्ता बताया है वह है मन की शुद्धि। भगवान बुद्ध ने इच्छा और लोभ को सभी बुराईयों की जड़ बताया था। उन्होने सदाचार जीवन जीने को ही धर्म कहा था। भगवान बुद्ध का धर्म सर्व मंगलकारी है। विश्व में व्याप्त कोविड-19 संक्रमित महामारी को जड़ से खत्म करने की तथागत भगवान गौतम बुद्ध से प्रार्थना की गयी। इस मौके पर भानु प्रताप गौतम, सिद्धार्थ गौतम, कुसमा देवी, दिनेश कुमार, राम आसरे सहित तमाम लोगों ने सामाजिक दूरी का पालन करते हुए जयन्ती को श्रद्धापूर्वक मनाया।

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