बच्चा चोर गिरोह की अफवाहों से आमजन में दहशत

 दुष्प्रचार करने वाले सोशल मीडिया पर लगाम की जरूरत
अफवाहों के चलते मेडिकल टीम सहित कई लोग हुए शिकार
फतेहपुर। प्रदेश के अलग-अलग जनपदों से आये दिन बच्चा चोर गिरोह को लेकर निर्दोष लोगों को सामूहिक रूप से पीटे जाने की घटनाएं रूकने का नाम नहीं ले रही हैं। इन अफवाहों के लिए और कोई नहीं सोशल मीडिया पर वायरल होने वाली खबरें जिम्मेदार हैं। अफवाहों के चलते ही गाजीपुर थाना क्षेत्र के खेसहन गांव में जहां मेडिकल टीम व पुलिस कर्मियों को खामियाजा भुगतना पड़ा वहीं जनपद के कई अन्य स्थानों पर भी बच्चा शोर के शक में भीड़ ने लोगों को लहुलूहान कर दिया। जांच-पड़ताल के बाद पीटे गये अधिकांश लोग मानसिक विक्षिप्त निकले।
बताते चलें कि प्रदेश में जुलाई से सितम्बर माह के बीच हर वर्ष नया बखेड़ा खड़ा हो जाता है। वर्षों पहले मुंह नोचवा का जोर रहा। वहीं चोटी कटवा की खबरों ने भी लोगों को दहशत में डाल दिया था। मुंह नोचवा व चोटी कटवा के बाद पिछले एक माह से बच्चा चोर का शोर थमने का नाम नहीं ले रहा है। बच्चा चोर की आड़ में लोग अपनी दुश्मनी भी भुनाने में जुटे हुए हैं। इन सब अफवाहों को प्रचारित करने में लोकतांत्रिक देश में सोशल मीडिया महत्वपूर्ण भूमिका अदा कर रहा है। ऐसी परिस्थितियों में सरकार को सोशल मीडिया पर अंकुश लगाने की जरूरत है। अफवाहों के कारण ही गाजीपुर थाना क्षेत्र के खेसहन गांव में मेडिकल कैम्प लगाने पहुंची स्वास्थ्य विभाग की टीम को अराजकतत्वों ने बंधक बना लिया। बंधक बनाये जाने की सूचना पर गाजीपुर पुलिस मौके पर पहुंची थी। जहां पर पुलिस के लाख प्रयास के बाद भी अराजकतत्व नहीं माने और पुलिस और स्वास्थ्य विभाग की टीम पर पथराव कर दिया था। आत्मरक्षार्थ के लिए पुलिस को फायरिंग भी करनी पड़ी थी। जबकि स्वास्थ्य विभाग की यही टीम दस दिन पहले गांव में शिविर लगा चुकी थी। बच्चा चोर की अफवाह पर जिले के कई अन्य थाना क्षेत्रों में भी अराजकतत्वों की सामूहिक भीड़ ने महिला सहित कई लोगों की पिटाई कर दी। पुलिस के पहुंचने के बाद ऐसे लोगों की जान बच सकी। जांच-पड़ताल में सभी घटनाएं कपोलकलपित निकली। इतना ही नहीं पीटे गये अधिकांश लोग मानसिक रूप से विक्षिप्त भी पाये गये। बच्चा चोर की अफवाह को लेकर स्कूल जाने वाले छात्र-छात्राओं के अभिभावक दहशत में हैं। इतना ही नहीं विद्यालय प्रबंध तंत्र द्वारा परिवार के सदस्यों द्वारा अपने बच्चों को स्कूल से घर लाने में भी दिक्कतें पैदा की जा रही है। अपने बच्चे को लाने के लिए भी अभिभावकों को अपना परिचय पत्र देना पड़ रहा है।

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