नारी को लोगों ने गलत ही अबला कहा है , कौन सा रोल है जिसे एक नारी अदा नहीं करती- जिलाधिकारी नागेन्द्र प्रसाद सिंह

आजमगढ़। नारी शक्ति संस्थान द्वारा शनिवार को पांडेय बाजार स्थित शिब्ली एकेडमी में नारी शक्ति सम्मान समारोह-2020 का आयोजन किया गया। सर्वप्रथम संरक्षक मंडल द्वारा मां दुर्गा के चित्र के समक्ष दीप प्रज्वलित कर राष्ट्रगान के साथ समारोह का विधिवत शुभारंभ किया। इस दौरान कई विद्यालयों की बच्चियों ने ऐतिहासिक, पौराणिक, सांस्कृतिक चरित्र पर आधारित झांकी प्रस्तुत कर सभी का मनमोह लिया। इसके बाद अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस की पूर्व संध्या पर विशिष्ट कार्य करने वाली 11 नारी शक्तियों को नारी शक्ति सम्मान-2020 से नवाजा गया। सम्मान समारोह की अध्यक्षता डा मालती मिश्रा व संचालन अंशु अस्थाना ने किया।
मुख्य अतिथि जिलाधि कारी नागेन्द्र प्रसाद सिंह ने कहा कि नारी को लोगों ने गलत ही अबला कहा हैं क्योंकि यदि मां गर्भ से लेकर 12 वर्ष की उम्र तक नारी और समाज के प्रति उसको संस्कार एवं कर्तव्य के प्रति संस्कारित करें तो शायद किसी कानून की आवश्यकता ही न पड़े। आगे कहाकि जीवन का वह कौन सा रोल है जिसे एक नारी अदा नहीं करती। जैसे हास्पिटैलिटी से लेकर मां बाप की सेवा तक यदि हम नारी के गृहस्थ कार्य को ही जोड़ दे तो किसी भी एक क्लास वन अधिकारी की  तनख्वाह से ज्यादा उसकी कीमत होगी। लेकिन पुरूषवादी समाज उसे बार बार यह कहता है कि तुम करती ही क्या हो जो सर्वथा गलत है।
विशिष्ट अतिथि पुलिस अधीक्षक प्रोफेसर त्रिवेणी सिंह ने साइबर क्राइम पर बोलते हुए कहाकि हम सबको कुछ सावधानियां बरतनी चाहिए जिससे कि साइबर अपराध से पीड़ित होने से हम खुद को बचा सकें। जैसे अपने मोबाईल को थ्री लेयर सेक्योरिटी सिस्टम में रखें। जिससे यदि कोई एक लेयर सेक्योरिटी सिस्टम को तोड़ लें तब भी दो लेयर बचा रहे और मोबाईल एप को 2 लेयर सेक्योरिटी में रखें जिससे हाईजैंकिग ना हो सकें। महिलाओं से उन्होने विशेष आग्रह किया कि किसी अपरचित को अपनी फोटो, मोबाईल नम्बर, ईमेल आईडी शेयर ना करें। 

सचिव डा पूनम तिवारी ने कहा कि महिलाएं खुद को असहाय और कमजोर न समझे क्योंकि आधी आबादी नारी शक्तियों की हैं, आज पूरे विश्व में नारी शक्तियों ने अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाया है अब हर दिन को महिला दिवस के रूप में मनाना है। इसके लिए नारी शक्ति हर स्तर पर महिलाओं को दुर्गा शक्ति बनाने के लिए तैयार है। डा तिवारी ने आगे कहा कि संस्थान विश्व महिला दिवस पर नारी शक्तियों का विगत कई वर्षों से सम्मान करती चली आ रही है। जिसका उद्देश्य सम्मानित होने वाली नारी शक्तियों से दूसरी महिलाएं प्रेरित हो और नारी शक्ति ही नारी की प्रेरणा का सबब बनें।

अध्यक्षीय संबोधन में संस्थान की अध्यक्ष डा मनीषा मिश्रा ने संस्था के कार्यो को गिनाते हुए बताया कि नारी शक्ति संस्थान आज महिलाओं के स्वास्थ्य, शिक्षा, सुरक्षा के उद्देश्य को लेकर आगे बढ़ रही है।  और यथा संभव महिलाओं की मदद भी कर रही है। इस संदर्भ में आगे बोलते हुए उन्होने कहाकि संस्था महिलाओं को अपने अधिकार के प्रति जागृत करने के लिए कृत संकल्प है और महिला आज जागरूक होकर कार्य भी कर रही है। साथ ही डा मिश्रा ने महिलाओं को संकल्प दिलाया कि किसी भी शोषण पर महिलाएं एकजुट होकर मुखर आवाज उठाये और कदम से कदम मिलाकर समाज मे ंसशक्त दावेदारी करें। श्रीमती मिश्रा ने कहा कि आज समाजसेवा, शिक्षा, खेल, हर क्षेत्र में नारी अपनी शक्ति का परचम लहरा रही है और आधी आबादी को उत्प्रेरित कर रही है वे अबला नहीं नारी शक्ति के रूप में स्थापित हों। सम्मान समारोह में ंसरक्षक, पदाधिकारी व सदस्यों सहित सम्भ्रांत नारी शक्तियां मौजूद रहे।

ये नारी शक्तियां हुई सम्मानित-
अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस की पूर्व संध्या पर नारी शक्ति सम्मान समारोह 2020 में विभिन्न क्षेत्रों में उत्कृष्ट कार्य करने वाली नारी शक्तियों को सम्मानित किया गया। समारोह में मुख्य अतिथियों द्वारा वाराणसी की अंकिता खत्री, बलिया से कनक चक्रधर, उमा सिंह, मऊ से आरती वर्मा, फैजाबाद से भारती सिंह व प्रिंयका त्रिपाठी, जौनपुर से पधारी जान्हवी श्रीवास्तव व आजमगढ़ की फातिमा जिया, नीलिमा श्रीवास्तव, जयंती राजभर, सुनीता सिंह को नारी शक्ति सम्मान 2020 प्रदान सम्मानित किया। इसके बाद सम्मानित हुई नारी शक्तियों ने अपने-अपने क्षेत्र के अनुभवों को साझा कर नारी शक्तियों को जागरूक करने काम किया। इसके साथ ही पूरे वर्ष भर संस्थान के हित में तत्पर्य रहने वाली 6 नारी शक्तियों में विजयलक्ष्मी मिश्रा, अंशु अस्थाना, नीतू कश्यप, रश्मि डालमिया, अनिता आलोक श्रीवास्तव, पूनम जसपाल सिंह का भी सम्मान किया गया।

कानून सख्त करने को लेकर उठायी आवाज
समारोह के दौरान निर्भया मामले से नाराज नारी शक्ति संस्थान ने भारत सरकार से मांग किया कि जिस तरह से निर्भया के केस में लचर कानून व्यवस्था की वजह से बार-बार न्याय मिलने में देरी हो रही है। उसको गंभीरता से लेते हुए सरकार कानून में संशोधन करके ऐसी व्यवस्था बनाये ताकि इस तरह की पृनरावृत्ति न हो। संस्थान ने स्पष्ट कहा कि न्याय मिलने में देरी न्याय न मिलने के बराबर होती है।
इस अवसर पर संस्था के समस्त पदाधिकारीगण, संरक्षक मंडल, सदस्यगण एवं बौधिक मंडल उपस्थित रहा।

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