तो लगता है कि कानून अभी ज़िंदा है…

कहते हैं कि खुदा के घर देर है लेकिन अंधेर नहीं . ठीक वैसी ही बात हमारे देश में कानून व्यस्था को नही लेकर कही जा सकती है .अक्सर हमारे देश में बलात्कार और उसके बाद फिर ह्त्या जैसी जघन्य वारदातें होती रहती हैं . इनमे से अक्सर न्याय की आस में पीड़ित की उम्मीदों की सांसों का दामन कानून के चौखट पर अपनी सिसकती उम्मीदों को तोड़ देती हैं . लेकिन जब किसी भी अपराध में अपराधी को सज़ा मिलती है तो लगता है कि कानून अभी ज़िंदा है

..लगता है कि उन सिसकते हुए उम्मीदों की डोर अभी नहीं टूटेगी , जो अपने अन्दर दर्द के अतः समंदर को समेटे हुए है ..अब अपराधियों को मिल रही सजाओं से एक नए भारत कि धुंधली सी तस्वीर नज़र आने लगी है .ऐसा हम इसलिए कह रहे हैं कि त्रिपुरा की एक अदालत ने 2018 में नाबालिग लड़की से दुष्कर्म और हत्या मामले में 26 वर्षीय व्यक्ति तांती को मौत की सजा सुनाई है. त्रिपुरा उत्तरी जिले के पुलिस अधीक्षक भानुपद चक्रवर्ती ने बताया कि उत्तरी त्रिपुरा की जिला अदालत ने यह फैसला सुनाया.

महेशपुर के टी एस्टेट में मंडपटीला इलाके में रहने वाले तांती ने 6 साल की एक बच्ची को अगवा कर लिया. बाद में बच्ची का क्षत-विक्षत शव पाया गया था.
पुलिस ने कहा कि तांती को लड़की की हत्या करने के लिए मौत की सजा सुनाई गई और दुष्कर्म के मामले में POCSO अधिनियम की धारा 4 के तहत 50,000 रुपये के जुर्माने के साथ दो आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई. अगर आरोपी जुर्माना देने में विफल रहता है, तो उसकी सजा एक साल बढ़ जाएगी.

बच्ची का शव मिलने के बाद तांती गायब हो गया. इसके बाद पुलिस को तांती पर शक हुआ. उसे पास के एक गांव से गिरफ्तार किया गया. पुलिस की कड़ी पूछताछ में वह टूट गया और अपना गुनाह कबूल कर लिया. इस मामले में 21 लोगों ने गवाही दी और सबूत की जांच पड़ताल के बाद कोर्ट ने यह सजा सुनाई है.

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