जिन छह परियोजनाओं पर कार्य हुआ, उनका भी पैसा बकाया है

आयोग पटना की टीम कुशीनगर जिले में आई थी।
जगह-जगह भ्रमण कर संवेदनशील स्थानों को देखा और कार्य योजना भेजने का सुझाव दिया था। बाढ़ खंड डिवीजन की ओर से छितौनी तट बंध की छह, एपी तटबंध की 16, अमवा खास की 14 और नरवाजोत पिपरा घाट की एक परियोजना भेजी गई थी। कुल 250 करोड़ की लागत वाली इन 40 परियोजनाओं में से अब तक अमवाखास की छह परियोजनाएं ही स्वीकृत र्हुइं हैं। 60 करोड़ की की लागत वाली इन छह परियोजनाओं के लिए भी केवल पांच करोड़ रुपये का ही भुगतान हो पाया है। शेष 34 परियोजनाएं अभी फाइलों में ही हैं। एपी तटबंध की कोई भी परियोजना अभी तक स्वीकृत नहीं हो पाई है। जबकि पिछले वर्ष अहिरौलीदान और इस बार लक्ष्मीपुर 30 परिवार कटान के कारण बेघर हो गए हैं। इस संबंध में बाढ़ खंड के अधिशासी अभियंता भरत राम का कहना है की गंगा बाढ़ नियंत्रण आयोग पटना की टीम ने जिन संवेदनशील स्थलों पर कार्ययोजना बनाने का सुझाव दिया था, उसे समय से बनाकर स्वीकृति के लिए भेज दिया गया था। अमवा खास तटबंध की छह परियोजनाओं पर कार्य कराया गया है। लक्ष्मीपुर गांव के सामने अनुरक्षण मद से कार्य कराया जा रहा है। तटबंध की सुरक्षा के लिए विशेष उपाय किए जा रहे हैं। बजट मिलते ही शेष परियोजनाओं को भी पूरा कराया जाएगा।
गंडक का पानी घटा लेकिन खतरा बरकरार
तमकुहीरोड। गंडक नदी का पानी तेजी से नीचे आने लगा है। इससे अहिरौलीदान गांव के पास से पानी हटने लगा है। परंतु कटान का खतरा अभी भी बरकरार है। गंडक नदी का डिस्चार्ज पिछले मंगलवार को 2.15 लाख क्यूसेक हो गया था। इससे एपी बांध के किनारे स्थित अहिरौलीदान में भी कई घर बाढ़ के पानी से घिर गए थे। अगले दिन से ही डिस्चार्ज कम होने लगा था। अब नदी का जलस्तर तेजी से नीचे आने लगा है। परंतु तेजी से घटती नदी भी कटान करती है। ग्रामीण जितेंद्र सिंह, मजिस्टर पासवान, अनवत राम, संजय सिंह, जगदीश चौहान, पप्पू यादव, कृष्णा निषाद, बाबूलाल बैठा आदि का कहना है कि इस नदी में कटान का सर्वाधिक खतरा तभी होता है, जब जलस्तर तेजी से कम होने लगता है। इस संबंध में बाढ़ खंड के एसडीओ एसके प्रियदर्शी का कहना है कि स्थिति पर नजर रखी जा रही है। फिलहाल, एपी बांध पर कहीं खतरा नहीं है।
जलस्तर घटने व बचाव कार्य से अब नियंत्रण में है नदी
बरवापट्टी। अमवाखास तटबंध पर लक्ष्मीपुर गांव के सामने हो रहे कटान को नियंत्रित कर लिया गया है। पर्याप्त मात्रा में बोल्डर एवं अन्य सामान मौके पर पहुंच चुका है। ये बातें सोमवार को अमवाखास तटबंध के लक्ष्मीपुर गांव के सामने चल रहे बचाव कार्य की निगरानी कर रहे अधीक्षण अभियंता केके राय ने कहीं। एक्सईएन भरत राम और एसडीओ जयशंकर पांडेय के साथ बांध पर मौजूद एसी ने बताया कि शुक्रवार और शनिवार को कटान की रफ्तार काफी तेज थी। एसी के अनुसार बीते जून में बांध का निरीक्षण किया गया था। उस वक्त अमवा खास तटबंध का किलोमीटर 08.4 संवेदनशील था। वहां नदी का सीधा दबाव था। परंतु जलस्तर में तेजी से उतार चढ़ाव के कारण नदी की रुख अचानक पलट गया और अनुमानित संवेदनशील स्थल से पहले ही कटान शुरू हो गई। बचाव कार्य तेजी से करा कर स्थिति को नियंत्रण में कर लिया गया है।
कटान देखने जुट रही भीड़ से प्रभावित हो रहा बचाव कार्य
प्रशासन भीड़ हटाने का नहीं कर पा रहा इंतजाम, हादसों की है आशंका
दुदही/बरवापट्टी। अमवाखास तटबंध पर लक्ष्मीपुर गांव के सामने हो रहे कटान को देखने के लिये उमड़ रही भीड़ बचाव कार्य में बाधा बन रही है। बंधे पर वाहनों व अन्य लोगों भी भीड़ के चलते बोल्डर लदे ट्रैक्टरों को भी कटान स्थल तक पहुंचने में दिक्कत हो रही है। वाहन चालक हादसों की आशंका से खुद ही डरे हुए हैं।
अमवाखास तटबंध पर लक्ष्मीपुर गांव के सामने झोपड़ी बनाकर रह रहे 30 लोगों का घर कटकर नदी में विलीन हो चुका है। कटान स्थल पर बाढ़ खंड की तरफ से बोल्डर आदि गिराकर बांध केे बचाने का प्रयास हो रहा है। नदी की कटान और बचाव कार्य को देखने के लिए लोगों की भीड़ जुट रही है। बंधे पर बाइक, साइकिल के अलावा कार व अन्य वाहनों से लोग पहुंच रहे हैं। उसी रास्ते ट्रकों को बोल्डर लेकर पहुंचना है। ट्रक से बोल्डर उतारने और उसे ट्रैक्टर-ट्रेलर से कटान वाली जगह पर लेकर जाना है। परंतु भीड़ के चलते वाहन चालकों को दिक्कत हो रही है। बांध खंड के अधीक्षण अभियंता केके राय का कहना है कि प्रशासन अगर भीड़ नियंत्रित कर ले तो बचाव कार्य को और तेजी से पूरा कराया जा सकता है। परंतु प्रशासन भीड़ नियंत्रण की बजाय केवल बाढ़ खंड को दोषी ठहराने में लगा हुआ है।
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