केरल हाईकोर्ट के जज को पदमुक्त करने के लिए प्रदर्शन

 डीएम को ज्ञापन देने जाते परिषद के पदाधिकारी 
फतेहपुर। मिशन सुरक्षा परिषद ने केरल हाईकोर्ट के न्यायमूर्ति वी0 चिताम्बरेश द्वारा तमिल ब्राम्हण समाज के ग्लोबल सम्मेलन में ब्राम्हण समाज को सर्वोच्च ठहराये जाने व अन्य जातियों को दोयम दर्जे का कहने के विरोध में कलेक्ट्रेट पर प्रदर्शन करके जिलाधिकारी के माध्यम से राष्ट्रपति व उच्चतम न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश को ज्ञापन भेजा है। जिसमें न्यायमूर्ति को न्यायिक कार्यों से प्रतिबन्धित करके पदमुक्त किये जाने की मांग की गयी है।
शुक्रवार को मिशन सुरक्षा परिषद के जिलाध्यक्ष डा0 फूलचन्द्र निषाद के नेतृत्व में संगठन के पदाधिकारियों ने केरल हाईकोर्ट के न्यायमूर्ति वी0 चिताम्बरेश द्वारा तमिल ब्राम्हण समाज के ग्लोबल सम्मेलन में ब्राम्हण समाज का गुणगान किया। जबकि अन्य जातियों, धर्म व सम्प्रदाय के लोगों को हीन और दोयम दर्जे का साबित करने पर कड़ा एतराज जताते हुए जस्टिस के बयान की जहां निन्दा की है वहीं राष्ट्रपति व सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश को ज्ञापन भेजकर न्यायमूर्ति के खिलाफ महाभियोग लगाकर पदमुक्त करके कानूनी तौर पर दण्डित किये जाने की मांग की है। ज्ञापन में यह भी कहा गया कि ब्राम्हणों के अलावा अन्य समाज के वर्गों को निम्न समझने वाले न्यायमूर्ति को न्यायिक कार्यों से मुक्त किया जाये। यह भी कहा गया कि उनके बयानों से ऐसा लगता है कि अब तक उनके द्वारा किये गये फैसलों में कमजोर वर्गों के साथ अन्याय कर न्यायिक व्यवस्था को दूषित भी किया गया होगा। वक्ताओं ने कहा कि न्यायमूर्ति का संवैधानिक पद पर रहते हुए ऐसा बयान संविधान के मूल अधिकारों व सामाजिक न्याय की अवधारणा के विरूद्ध है। जो संविधान के अनुच्छेद 340 व 341 की अवहेलना के दायरे में आता है। ज्ञापन देने वालों में वरिष्ठ अधिवक्ता सेवालाल सोनकर के अलावा अन्य पदाधिकारी शामिल रहे।

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