कान्वेंट की तर्ज पर अंग्रेजी में बात करते बच्चे

शिक्षिका आसिया फारूकी।
फतेहपुर। प्राथमिक विद्यालयों की स्थिति से तो सभी वाकिफ है। संसाधनों के अभाव में कहीं जर्जर भवन जर्जर दिखाई देते है तो कही शिक्षकों व बच्चों का ही टोटा है। प्रदेश सरकार के अथक प्रयासों से स्कूलों में बुनियादी जरूरत की चीजें भले ही पहुंचाई जा रही है लेकिन संसाधनों के सीमित होने से सभी की आवश्यकताओं को पूरा होना अभी बाकी है लेकिन सीमित संसाधनों को अपना भाग्य मानकर मेहनत और लगन के बल पर बच्चों को अच्छी शिक्षा देने का जुनून प्राथमिक विद्यालय की शिक्षिका आसिया फारूकी के रूप में देखा जा सकता है। जिनके अथक प्रयासों से स्कूल न सिर्फ एक मॉडल विद्यालय में बदल गया बल्कि बच्चो की शिक्षा भी कान्वेंट स्कूलों की तर्ज पर मिल रही है। विद्यालय में बच्चे अंग्रेजी माध्यम के स्कूलों जैसा अभिवादन करते है बल्कि उन्हें इंग्लिश बोलना भी सिखाया जा रहा है और उन्हें स्मार्ट क्लास में प्रोजेक्टरों के मध्यम से पढ़ाई कराई जा रही है। इस कार्य को करने के लिये प्रधानाचार्य आसिया फारूकी को अपनी जेब से लाखों रुपये खर्च करने पड़े। आवश्यकताओं को देखते हुए उन्हें निजी स्टाफ को भी रखना पड़ा जिसका प्रतिमाह होने वाला खर्च वह अपने वेतन से खर्च कर रही है। आसिया के अनुसार प्राथमिक विद्यालय अस्ती में उनकी नियुक्ति वर्ष 2009 में हुई थी। एकल शिक्षक वाले स्कूल में भवन के नाम पर जर्जर हालत में कमरे टूटी खिड़किया थी तो कंटीली झाड़ियों कूड़े के ढेर के बीच स्कूल का प्रांगण। उन्होंने बताया कि स्कूल परिसर में जुएं की फडे व शराबियो व अराजकतत्वों का डेरा बना हुआ था। उनके विरोध पर काफी मशक्कत के बाद स्कूल को मुक्त कराया जा सका। शिक्षिका के अथक प्रयासों को न सिर्फ जिला स्तर पर सराहा गया बल्कि अनेक मंचो से सम्मानित भी किया गया। प्रदेश सरकार द्वारा राज्य पुरस्कार से भी सम्मानित किया गया। प्राथमिक विद्यालय अस्ति में प्राथमिक अन्य स्कूलों की तुलना में छात्र छात्राओं की संख्या भी ठीक ठाक है जबकि उनकी उपस्थिति भी 90 प्रतिशत तक रहती है। विद्यालय में बनने वाला मध्यान भोजन के लिये बच्चो को टाइल्स युक्त कमरे में सुव्यवस्थित डेस्क में थाली परोसी जाती है। जबकि अलग से एक्टिविटी के लिये हाल निर्मित है। प्रधानाचार्य आसिया फारूकी ने बताया कि जर्जर हालत में पड़े हाल का उनके द्वारा निजी खर्च से जीर्णोद्धार कराया गया है। हाल में बच्चों के लिये महापुरुषों व ऐतिहासिक स्थलों की फोटो लगाने के साथ चित्रों व कार्टूनों के साथ कविताओं व कार्टून पात्र बनाये गए हैं। जिनके माध्यम से बच्चे कविताओं को याद करते व उनपर एक्टिंग करते है। स्कूल में प्रवेश करते ही रंगाई पुताई के साथ साफ सुथरी चित्र युक्त दीवारे, स्वच्छ मैदान दिखाई देता है। स्कूल प्रांगण में जगह-जगह डस्टबिन स्वच्छ भारत के लिये बच्चों की हौसला अफजाई करते दिखाई देते है। टाइल्स लगी कक्षाओं में स्कूल की ड्रेस, जूते, मोजे, टाई व बेल्ट पहन कर बैठे बच्चे किसी परिषदीय विद्यालय के कम बल्कि किसी कॉन्वेंट स्कूल के बच्चे समझ आते है। प्रधानाचार्य के कक्ष में ब्लाक स्तर से लेकर प्रदेश स्तर तक मिलने वाली दर्जनों ट्राफियां मेडल व प्रशंसा पत्र व प्रमाण पत्र उनके द्वारा शिक्षा के लिये किये जा रहे कार्यो का खुद ही बखान करते है। गांव में निवास करने वाले गरीब असहाय और कमजोर वर्ग से सम्बंध रखने वाले छात्र छात्राओं को शिक्षण सामग्रियां स्कूल से मिल जाती है तो स्कूल के समय के बाद प्रधानाचार्य आसिया द्वारा बच्चों के निरक्षर अभिभावकों को भी पढ़ाया जाता है। बच्चो में सामाजिक एकता सभी धर्मों के तीज त्योहारों को भी बच्चो एव उनके अभिभावकों के साथ मिलकर मनाया जाता है। त्योहारों के मौके पर प्रधानाचार्य निर्धन बच्चो को तोहफे भी देती है। प्रधानाचार्य आसिया फारूकी ने बताया कि समाज के गरीब बच्चों को मुख्यधारा में शामिल करने के लिये स्कूल के सभी बच्चों के साथ मिलकर पढ़ाई करने से लेकर सभी त्योहारों को मनाया जाता है। बच्चो की शिक्षा और उनको संस्कार देने का जुनून देखकर प्रधानचार्य आसिया फारूकी को जिला स्तर से लेकर प्रदेश में राज्यपाल के हाथों से समानित किया जा चुका है।

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