एसडीएम व एसएचओ पडरौना ने कुशीनगर को दिया अभूतपूर्व उपहार , उजाड़ दी गई माँ दुर्गा की तेजोमयी मूर्ति

एसडीएम व एसएचओ पडरौना ने कुशीनगर को दिया अभूतपूर्व उपहार , उजाड़ दी गई माँ दुर्गा की तेजोमयी मूर्ति
मो एहतशाम जाफ़र 
सी आई बी इंडिया न्यूज
 जनपद  कुशीनगर
महिलाओं को न्याय मांगने पर मिल रही लाठी चार्ज की पूरी ग्राउंड रिपोर्ट
कुशीनगर,उ.प्र।जिले के कोतवाली पडरौना क्षेत्र के ग्राम जंगल चौरिया (बकुलहां) बाड़ी नदी स्थित छठ घाट एक स्थापित महावीर स्थान पर एक माँ दुर्गा का पूजित स्थान था जहा गांव के लोग पहले से माँ दुर्गा की पूजा करते थे और हाल ही में गांव के लोगों ने वहा चबूतरा बनवाया था।उपरोक्त सार्वजनिक जमीन लगभग 80-90 सालों से गांव समाज के लोग छठ घाट,दाह संस्कार,दफ़न और मान्यता प्राप्त महावीर स्थान व देवी स्थान के रूप में पूजा अर्चना करते आ रहें हैं।
बताया जाता है कि इस सार्वजनिक गांव समाज की कुल लगभग 20 कट्ठा जमीन का पट्टा 2014 में फर्जी तरीके पूर्वग्राम प्रधानपति द्वारा व बीडीसी ओमप्रकाश गौण व तुलसी प्रसाद को कर दिया गया था।जिसका पता ग्राम वासियों को 3 महीने पहले चला।गांव के लोगों ने शासन प्रशासन से गुहार लगा शुरू किया तो वर्तमान प्रधानपति कमलेश (संगीता देवी) द्वारा तरह-तरह  स्थानीय पुलिस का सहयोग लेकर  गांव वाला का उत्पीड़न किया जाने लगा।
 विगत 7 सितम्बर को  गांव की महिलाएँ अपनी समस्या लेकर स्थानिय थाना कोतवाली पर गयी।सुनवाई ना होने उन्होंने एसडीएम पडरौना का रास्ता रोका तो एसडीएम पडरौना एसएचओ पडरौना ने महिलाओं को थाने में खिंचाव लिया और लाठी डंडों से उनको पिटवाया व थाने में बैठाए रखा। उसके बाद 151 में चालान कर दिया।जैसे-तैसे उन गरीब महिलाओं की जमानत हो पाई अभी कुछ की बाकि है।बीते मंगलवार को अल सुबह स्थानीय पुलिस कमलेश और हरिओम के साथ बाड़ी नदी के घाट पहुँची और और माँ दुर्गा की मूर्ति को तोड़ने लगी गांव वालों और महिलाओं ने विरोध किया तो उन पर पुनः लाठियां बरसाई और खदेड़ दिया व माँ दुर्गा की मूर्ति उजाड़ कर कहीं भिजवा दिया।
ये पीड़ित महिलाओ ने कहा कि हम लोगों ने अपने सांसद और अपने मोदी जी के लिये भरी दोपहरी में नाचते गाते हुए गांव गांव घूम कर सांसद पत्नी के साथ और महिला मोर्चे के साथ वोट माँगा था।भाजपा महिला मोर्चा नेत्री एडवोकेट सीता सिंह उर्फ अंशु ने कही कि आज अपनी हक को मांगने वाली महिलाओं को न्याय दिलाने की जगह पुलिस अबलाओं पर पुलिस लाठियां बरसा रही है।पीड़ित महिलाओं की पीड़ा सुनने व आंसू पोछने वाला कोई नही है।जबकि वो महिलाएं अपने गांव समाज आस्था की प्रतिमूर्ति के लिए इतने जुल्म सितम सह रही हैं।
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