आज़मगढ़ पुलिस का ये कैसा कारनामा

एक तरफ आजमगढ़ पुलिस.. पुलिस कप्तान त्रिवेणी सिंह के नेतृत्व में जिले की पुलिस लगातार अपराधियों की धर पकड़ कर रही है ..और दुर्दांत अपराधियों का इनकाउंटर करके आम जनता को खौफ के साए से आजादी दिला रही है , और जनता को विश्वास दिला रही है कि आजमगढ़ जिले में अपराध का नामोनिशान नहीं रहेगा और आम जनता पुलिस पर विश्वास बनाए रखे ऐसे माहौल को तेज़ तर्रार एसएसपी प्रो० त्रिवेणी सिंह आजमगढ़ में बना रहे हैं तो दूसरी तरफ आजमगढ़ के निजामाबाद थाने की पुलिस शायद अपने कप्तान की सारी मेहनत पर पानी फेरना चाहती है ! निजामाबाद थानान्तर्गत जगदीशपुर सेंटरवा गांव में कैलाश यादव और जियावन यादव में पुराने ज़मीनी विवाद में दोनो पक्षों में जमकर मारपीट हुई , जिसमे दोनों ही पक्ष के लोग घायल हुए ! इसके बाद सूचना पर प्रभारी निरीक्षक निजामाबाद दिनेश कुमार सिंह हमराहियों के साथ पहुंचकर दोनों पक्षों को थाने पर लेकर आये ..ऐसे आरोप लगे हैं कि इंस्पेक्टर निजामाबाद दिनेश कुमार सिंह जियावन यादव और लाल बहादुर यादव पर जबरदस्ती दबाव बनाकर सुलह करवाना चाहते थे ..इसके बाद अगले दिन फिर दोनों पक्षों की महिलाओं में विवाद हो गया ! ऐसे आरोप लग रहे हैं कि प्रभारी निरीक्षक हमराहीयों के साथ पहुंचकर जियावन यादव के घर का दरवाजा तोड़कर महिलाओं के साथ अभद्रता करते हुए , उन्हें मारा पीटा ..और बाल पकड़कर घसीटते हुए परिवार के जियावन यादव सहित 7 लोगों को गिरफ्तार कर लिया , जिसमें कुछ बच्चियां नाबालिक भी शामिल हैं . पीड़ित परिजनों का कहना है कि बिना महिला कांस्टेबल के प्रभारी निरीक्षक का किसी के घर पहुंचकर महिलाओं के साथ अभद्रता करना है यह दर्शाता है कि पुलिस का ये गैर जिम्मेदाराना रवैया है . मनाव्धिकारों का हनन करने से भी निजामाबाद की पुलिस नहीं चूकी . बतादें कि जिया वन यादव के भतीजे राहुल यादव की 25 जनवरी को तिलक है और 3 फरवरी को शादी होनी है ..इस घटना के बाद पीड़ित परिजनों से तुअरी देवी नामक महिला अपने वक्तव्य में पुलिस पर गंभीर आरोप लगाए हैं .उन्होंने बताया कि रात 8:00 बजे हमारे बेटे बहू और पोते को थाने पर ले जाने के बाद जमकर लूटपाट की गयी और घर में शादी के लिए रखे गहने और नगदी ₹200000 बक्सा तोड़कर उठा ले गए पुलिस वाले ! पुलिस के इस कृत्य से पूरे गांव के लोग दहशत में हैं, और ग्रामीण काफी आक्रोश व्यक्त कर रहे हैं कि अगर जमीनी विवाद है तो पुरुषों को पकड़कर ले जाना चाहिए था और उनको मारना पीटना चाहिए था लेकिन बगैर महिला पुलिस के रहते हुए घर में घुसकर मारना पीटना महिलाओं के साथ अभद्रता करना, तथा लूटपाट करना यह कहां का न्याय है, ग्रामीणों के विरोध के बाद उजाला यादव पुत्री लाल बहादुर 8 वर्ष को थाने से छोड़ा गया और बाकी सभी को कानूनी धाराओं में मुकदमा दर्ज करके जेल भेज दिया गया !

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