आज़मगढ़ जिले के नेहरुहाल के सभागार में अधिवक्ता समाज ने एक विचार गोष्ठी का आयोजन किया

आज़मगढ़ : आज आज़मगढ़ जिले के नेहरुहाल के सभागार में अधिवक्ता समाज ने एक विचार गोष्ठी का आयोजन किया , जिसमे जिले के तमाम अधिवक्ताओं ने पहुंचकर संविधान बचाओ गोष्ठी का हिस्सा बने । वक्ताओं ने कहाकि भारत की सरकार इस देश मे फिर से मनु स्मृति का कानून लागू करना चाहते हैं , उन्होंने इसका हवाला भी दिया । असम में हुई NRC की लिस्ट में बलिया की तारादेवी केस का ज़िक्र किया और समझाया कि पहले तो उन्हें डिटेंशन सेंटर में डाल दिया गया और फिर काफी दिनों बाद उन्हें छोड़ा गया , और ये कहते हुए कि आप सबकुछ तो कर सकते हैं लेकिन आप वोट नही दे सकते हैं  ,तो कहीं न कहीं पिछड़ो , अल्पसंख्यकों से वोटिंग का अधिकार छीनने की आरएसएस और भाजपा की साजिश है । वक्ताओं ने कहाकि सरकार आज सरकार बेरोजगारी , गिरती अर्थव्यस्था , बंद पड़ रही कंपनियों , और गिरती  शिक्षा की चिंता नही है , सरकार दूसरे मुद्दों में देश को भटकाने और हिन्दू मुसलमान की लड़ाई कराकर अपने काले मंसूबों पर सफल होना चाहती है , जिसे जागरूक अधिवक्ता समाज कभी भी कामयाब नही होने देंगे । अधिवक्ताओं ने कहाकि देश के 40 प्रतिशत लोग तो भूमिहीन हैं , उन्हें अपनी जन्मतिथि याद नही तो अपने बाप दादा का कहना से याद होगा । अधिवक्ताओं ने कहाकि अगर देश मे NRC लागू होती है तो इससे 40 प्रतिशत भूमिहीन तो वोट का अधिकार खो ही देगा , साथ ही घुमंतु जातियों और जनजातियों का क्या होगा , उनके पास तो कुछ भी नही है । शम्स तबरेज़ नामक छात्र ने जो CAA के विरोध के चलते जेल गए थे , उनहोने अधिवक्ताओं का शुक्रिया अदा  किया कि अधिवक्ताओं ने बगैर कोई फीस लिए हम जैसे लोगों को बाहर निकालने में हम लोगों की मदद किया  । हमने न ही पत्थरबाज़ी की और न ही कोई कानून ही तोड़ा तो फिर कैसे हमे जेल भेज दिया गया । उसके बाद शम्स तबरेज़ ने कविता के माध्यम से हिंदुस्तान की सच्ची तस्वीर दिखाने की कोशिश की ।
 इस कार्यक्रम में समाजिक कार्यों में अपना जीवन रमाने वाले लोगों ने भी मंच से संबोधन करते हुए कहाकि आरएसएस ने आज देश को नया विमर्श दे दिया है और इंसानियत , मानवतावादी सोच  कई सौ सालों की यात्रा के बाद आज फिर वहीं पहुँच गयी हैं जहां से हम चले थे । आज भारत के कानून से खेलने वालों ने देश के संवैधानिक ढाँचे को तोड़ दिया है और गरीबों असहायों , पिछड़ों , अल्पसंख्यको के वोट के अधिकार को छीनने की फ़िराक़ में हैं। आज संविधान पर ख़तरा है , सामाजिक तानेबाने पर खतरा है यह अलगाव की प्रक्रिया है , इसे किसी भी दशा में कामयाब नही होने दिया जाएगा ।
0Shares
Total Page Visits: 564 - Today Page Visits: 1

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *