आजमगढ़! प्रवासी मजदूर फिर चला परदेश

देशभर में कोरोना की वजह से लगे लॉक डाउन की वजह से एक तरफ देश की आर्थिक ढाँचे को बड़ा नुक्सान पहुंचा है , जिसकी सिर्फ कल्पना ही की जा सकती है , तो वहीँ प्रवासियों के पलायान का दर्द शायद ही कोई भूला हो . लेकिन कहते हैं न ज़रूरते इंसान को मजबूर बना देती हैं . ज़रूरतों को पूरा करने के लिए अब प्रवासी भी वहीँ पहुँचना शुरू हो गए हैं , जहां से कुछ ही दिन पहले दर्द की इन्तेहा झेलते हुए वो अपने गाँव तक पहुंचा था . धीरे धीरे हम भारत के लोगों ने कोरोना के साथ जीना सीख लिया है . नहीं तो जिस आजमगढ़ में मुबारकपुर के एक कन्टेन्टमेंट जोन को देखकर लोगों में डर फ़ैल गया था अब उसी आजमगढ़ में 70 के आसपास कन्टेन्टमेंट जोन बन गए हैं , लेकिन सडकों पर दिख रही हलचल को देखकर अब सब सामान्य लग रहा है . जबसे उत्तर प्रदेश सरकार ने परिवहन सेवाओं को दुबारा शुरू किया है , तबसे कई तरह की बातें सुनने को मिली , कहा गया कि बसों में यात्रियों की कमी की वजह से परिवहन विभाग को भयंकर घाटा हो रहा है .वहीँ चालाक – परिचालकों की स्थिति भी खराब है , उनका कहना है कि हमारी मजबूरी है कि हम बसों को लेकर निकल रहे हैं , अगर नौकरी का सवाल नहीं रहता तो शायद हम नहीं निकलते . वहीँ बस में कई ऐसे यात्री मिले जो अब हरियाणा या अन्य शहरों की तरफ अपनी रोजी रोटी के लिए जा रहे हैं , उनका कहना है कि अगर काम पर वापस नहीं जायेंगे तो भूखों मर जायेंगे , बच्चों की फीस कैसे भरेंगे . अपने परिवार और बच्चों को अब हम यहीं छोड़कर जा रहे हैं , ताकि हमारी ज़िन्दगी चलती रहे …

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