” आईरा ” के शूरवीर सुमन मिश्रा को ” ब्रावो इंटरनेशनल बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड ” का मिला सम्मान

कहते हैं कि मुश्किल में समय में जिसने  सही निर्णय लिया और अपने काम को सही ढंग से करते रहे तो उनकी जीत ज़रूर होती है चाहे क्षेत्र कोई भी हो . कहा ये भी जाता है कि विषम परिस्थितियों में जो अपने किरदार को संभाल कर रखता है इतिहास भी वही बनाता है .ये बात हमेशा से ही सच साबित होते आई है .
आज जब एक तरफ पत्रकारिता के क्षेत्र में पत्रकारों की राहें दुरूह हो जा रही हैं . सवाल पूछने पर पत्रकारों की हैसियत पूछी जाती है , और उनसे ये कहा जाता है कि तुम्हारी हैसियत है ये सवाल पूछने की . तो वो पत्रकार ये कहने से भी हिचकता है कि मुझे ये अधिकार मेरा संविधान देता है .वो संविधान जिसकी वजह से तुम्हारे जैसे नेता हमेशा जनता के आगे हाथ जोड़कर खड़े रहते हैं . बाबा  भीम राव आंबेडकर का वो संविधान मुझे ताकत देता है .

एक तरफ अगर ये स्थिति है तो वहीँ दूसरी तरफ ” आईरा ” है जो पत्रकारों का देश का सबसे बड़ा संगठन है .जो रात दिन पत्रकार हितों के लिए काम करता है . ” आईरा ” के चेयरमैन तारिक जकी और राष्ट्रीय महा सचिव  पुनीत निगम के कुशल निर्देशन में पत्रकार हितों की रक्षा , पत्रकार सुरक्षा कानून के लिए , पत्रकारों के अधिकारों की रक्षा के लिए सदा प्रयासरत रहते हैं …इसी ” आईरा ” की बिहार यूनिट के प्रदेश अध्यक्ष सुमन मिश्रा के संघर्षों ने पत्रकारिता को नया आयाम दे दिया जब ब्रावो इंटरनेशनल बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड ने सुमन मिश्रा को ” आईरा ” बिहार इकाई ने सबसे ज्यादा पत्रकारों को संगठित करने ….पत्रकारों के ऊपर हुए जुल्म के खिलाफ आवाज उठाने , पत्रकार सुरक्षा कानून लागू करवाने के लिए हमेशा संघर्ष करते रहने के लिए सुमन मिश्रा का नाम इंटरनेशनल बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड में नाम दर्ज किया है .

इस सम्मान से जहां ” आईरा ” संगठन में एक नयी ऊर्जा का संचार हुआ है .वहीँ पर ये बात भी सत्य हो गयी है  कि अगर आप सत्य के मार्ग पर हैं , तो परस्थितियाँ चाहे जितनी भी प्रतिकूल हों , नए सूरज और सवेरे का उदय होना तो तय है . और यही शास्वत सत्य है . सुमन मिश्रा की इस उपलब्धि से बिहार को एक नया गौरव , और पत्रकारिता को एक नयी धार मिली है , जिससे पूरे भारत के पत्रकारिता के क्षेत्र , समाज सेवा के क्षेत्र और देशभर के साहित्यकारों का समर्थन और शुभकामनाये मिल रही हैं ..और निश्चित रूप से सभी आईरियन को अपने संगठन और उसके कार्यों पर गर्व की अनुभूति हो रही है .

आने वाले दिनों में आईरा की जिम्मेदारियां और बढ़ने वाली हैं , क्योंकि नित नए दिन पत्रकारिता और पत्रकारों के लिए ” आईरा ” का जो संघर्ष है वो और निखरने वाला है …वो और बढ़ने वाला है . साथ ही सुमन मिश्रा की जिम्मेदारियां और बड़ी हो गयी हैं , क्योंकि बिहार का ये लाल न थकने वाला है न रुकने वाला है . तो ऐसे में ” आईरा ” देश भर में पत्रकारों की एक बड़ी उम्मीद के तौर पर बड़ी मजबूती से सामने आया है .जिसे अपनी हरे कसौटी पर खरा उतरने आता है …क्योंकि ये ” आईरा ” है …” आईरा ” है …” आईरा ” है
लेखक _ मो० अकरम (वसीम अकरम)

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