असफलता’, एक ऐसा शब्द जो व्यक्ति के मन में आते ही मन विचलित हो उठता है

असफलता और चुनौतियाँ

  • असफलता’, एक ऐसा शब्द जो व्यक्ति के मन में आते ही मन विचलित हो उठता है। हम आम तौर पर असफलता को ऐसे परिपेक्ष्य में लेते हैं जिससे हमारा मनोबल गिरता चला जाता है और कभी- कभी तो व्यक्ति इतना अधिक निराश हो जाता है कि वो आत्मघाती कदम भी उठा लेता है।
    असफलता और समाज दोनों एक दूसरे से बहुत अधिक जुड़े हुए हैं क्योंकि हमारी मनः स्थिति का निर्धारण हमारा समाज ही करता है। यदि समाज हमारी असफलता का मखौल न उड़ाते हुए हमें आगे बढ़ने की सीख दे तो हम असफलता के ‘अ’ शब्द को हटाकर सफलता के नए आयाम छूने को न केवल उत्सुक होते हैं बल्कि उसे प्राप्त भी करते हैं। परंतु यदि हमारा समाज हमारी असफलता को हमारी कमजोरी बना कर हम पर हँसता है तो ऐसी स्थिति में हम न केवल उदास और हताश होते हैं बल्कि स्वयं का अस्तित्व भी समाप्त करने को तैयार हो जाते हैं। इस प्रकार हमारा समाज ही हमारा मार्गदर्शक होता है कि हमें असफल होने के बाद कौन सी राह चुननी है।
    ये तो रही हमारे समाज की भूमिका परंतु सबकुछ समाज ही नहीं होता क्योंकि समाज का निर्माण व्यक्ति से ही होता है अर्थात समाज से पहले व्यक्ति की निजी भावना का महत्व होता है। असफल व्यक्ति कभी कमजोर नहीं होता बल्कि उसे पहले की अपेक्षा और अधिक परिश्रम करने की आवश्यकता होती है। व्यक्ति को असफलता को एक चुनौती मानते हुए पहले की अपेक्षा और अधिक संघर्षशील होकर मुकाबला करना चाहिए। एक कहावत है कि ‘करत- करत अभ्यास के जड़मति होत सुजान’ अर्थात अभ्यास करते- करते ही व्यक्ति में सुधार होता है। व्यक्ति को कभी भी विषम परिस्थितियों में हिम्मत नहीं हारनी चाहिए बल्कि उसका डट कर मुकाबला करना चाहिए। ऐसा करके हम न केवल सफल हो सकते हैं बल्कि समाज के अन्य असफल लोगों की प्रेरणा का स्त्रोत बन सकते हैं।आशा है कि मेरे द्वारा रचित ये पंक्तियाँ, हर सफल और असफल व्यक्ति के जीवन में उत्साह का संचार कर सकेंगी-आशा है कि मेरे द्वारा रचित ये पंक्तियाँ, हर सफल और असफल व्यक्ति के जीवन में उत्साह का संचार कर सकेंगी-

गीत ख़ुशी के, गाते रहो ,

गम मे भी, मुस्काते रहो ।

सुख-दुःख है, दुनिया की रीत ,

हो न कभी, दुःख से भयभीत ।

जब हो विपरीत, समय प्रतीत ,

साबित कर, खुद को अरिजीत ।

हर मुश्किल से, लेकर सीख ,

पग आगे रख, हो निर्भीक ।

कभी न माँग, प्राणों की भीख ,

आहूत कर, खुद को रणवीर ।

गीत ख़ुशी के, गाते रहो ,

गम में भी, मुस्कुराते रहो ।

– मो. सारीम

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